नई दिल्ली,ईडी के बंगलूरू जोनल ऑफिस ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत 24 जून को कर्नाटक के बेंगलुरु, मैसूरु और बेलगावी में 14 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई राज्य के आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से संपत्ति जमा करने के आरोपों के आधार पर की गई है। आबकारी विभाग के अफसरों के परिजनों या उनके नाम पर अवैध ठेकेदारों ने जमकर शराब बेची। अफसरों ने अपने परिजनों या जानकार ठेकेदारों को ही शराब बेचने का लाइसेंस दिया। ईडी ने इस मामले में अभी तक 13 करोड़ रुपये की संपत्ति ‘अपराध की आय’ जब्त की है।
कर्नाटक में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जो केस दर्ज किया गया, उसमें आरोप लगा है कि उन्होंने अलग-अलग आबकारी लाइसेंस जारी करने या उनकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अवैध रूप से पैसे लिए। उस पैसे का इस्तेमाल अपनी निजी संपत्ति बढ़ाने के लिए किया। एफआईआर से मिली जानकारी की कई ऐसी शिकायतों और दस्तावेजों से पुष्टि की गई। ये शिकायतें और दस्तावेज डायरेक्टोरेट को आरोपी सरकारी कर्मचारियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों/प्रक्रियाओं के बारे में मिले थे। इन गतिविधियों में अचल/चल संपत्ति खरीदना, बेनामी लेनदेन और अवैध रूप से कमाए गए पैसे से अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के जरिए व्यवसायों में निवेश करना शामिल था। तलाशी अभियान में जिन मुख्य आरोपियों के यहां छापेमारी की गई, उनमें आबकारी अधिकारी जगदीश नायक, के.एम. थम्मन्ना और वाई.डी. मंजूनाथ के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य, बिजनेस पार्टनर और सहयोगी शामिल थे।