नई दिल्ली, कनाडा में खालिस्तान समर्थक संगठनों और उनसे जुड़े नेटवर्क के लिए हालात पहले जैसे नहीं रहे। भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच हुई हालिया बातचीत के बाद कनाडा ने ऐसे तत्वों के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। इससे न सिर्फ खालिस्तानी संगठनों की गतिविधियों पर असर पड़ा है, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की योजनाओं को भी झटका लगा है।
नई दिल्ली में हुई थी दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात
नई दिल्ली में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया गया था। इसके बाद कनाडाई प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कई ऐसी कार्रवाइयाँ देखने को मिली हैं, जिन्हें भारत सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक कनाडा का नया एंटी-हेट कानून है। कनाडा सरकार ने नफरत फैलाने और धार्मिक समुदायों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नया कानून पारित किया है, जो 18 जुलाई से लागू होगा। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इस कानून का असर उन खालिस्तान समर्थक समूहों पर भी पड़ेगा जो लंबे समय से मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन करते रहे हैं।