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स्वदेशी अत्याधुनिक एएलएच हेलीकाप्टर नौसेना में शामिल, आइएनएस उत्क्रोश पर की गई तैनाती

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय नौसेना की एयर स्क्वाड्रन (आइएनएएस) 325 में स्वदेश निर्मित अत्याधुनिक एएलएच हेलीकाप्टरों को शामिल कर लिया गया है। मंगलवार को पोर्ट ब्लेयर में आइएनएस उत्क्रोश पर आयोजित एक भव्य समारोह में इन्हें नौसेना में शामिल किया गया। अंडमान निकोबार कमान के कमांडर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने इस स्क्वाड्रन को नौसेना में शामिल किया। इन हेलीकाप्टरों ने इस साल की शुरुआत में अंडमान द्वीप समूह में पहली बार उड़ान भरी थी।
नौसेना में इन्हें आधिकारिक तौर पर 28 जनवरी को ही शामिल कर लिया गया था। मंगलवार को इन्हें आइएनएस उत्क्रोश पर तैनात किया गया। इस मौके पर आइएनएस उत्क्रोश को बधाई देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने हाल के राष्ट्रीय संकट के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा निभाई गई भूमिका और एएलएच द्वारा प्रदान की गई असाधारण सेवा का उल्लेख किया।
कई तरह की सेवाओं में काम आने वाले इस अत्याधुनिक स्वदेशी हल्के हेलीकाप्टर को बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया गया है। यह भारत सरकार की ओर से सैन्य विमान क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने की योजना की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
ये हेलीकप्टर नवीनतम पीढ़ी के एवियोनिक्स और रोल उपकरण से लैस हैं। इनका इस्घ्तेमाल मुख्य रूप से समुद्री रेकी के लिए किया जाएगा। इन्हें दूरस्घ्थ द्वीपों में मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आधिकारिक विज्ञप्घ्तिघ् में कहा गया है कि यह हेलीकाप्टर में निगरानी रडार से लैस है। इस स्क्वाड्रन की कमान कमांडर (कमांडर) अविनाश कुमार शर्मा के पास है जो कुशल और अनुभवी पायलट हैं।
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने अस्त्र एमके-1 मिसाइल प्रणाली हासिल करने के लिए 2,971 करोड़ रुपये के सौदे पर मुहर लगाई है। इसके लिए मंत्रालय ने सरकारी कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ समझौता किया है। हवा से हवा में मार करने वाली यह मिसाइल और संबंधित उपकरणों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना और नौसेना दोनों करेंगी। वायुसेना ने पहले ही इस मिसाइल के सफल परीक्षण कर लिए हैं। इसको सुखोई-30 एमके-1 से से जोड़ा गया है।

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