ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किया, रोजमर्रा की कई चीजें होंगी महंगी

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नईदिल्ली,ईरान और अमेरिका युद्धविराम की नजदीक पहुंचते-पहुंचते एक बार फिर संघर्ष में उलझ गए हैं। बीते 2 दिन से दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले किए हैं। आज हुए हमलों के बाद ईरान ने कहा है कि वो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह बंद कर रहा है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आइए जानते हैं रोजमर्रा की क्या-क्या चीजें महंगी हो सकती है।
भारत अपनी जरूरत की कुल रसोई गैस का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसकी ज्यादातर आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है और होर्मुज बंद रहने का मतलब आपूर्ति में व्यवधान। इससे रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। युद्ध के बीच पहले से ही गैस महंगी हो रही है। बीते 3 महीने में 2 बार घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ चुकी है। 7 जून को कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
गैस की तरह भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत पेट्रोल-डीजल आयात करता है। होर्मुज बंद होने से इसका आयात प्रभावित हुआ है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर ही बनी हुई है। इससे तेल विपणन कंपनियों और सरकार पर दबाव बढ़ेगा। 15 मई से अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कीमतें 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।
दरअसल, पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन महंगा हो जाता है। इससे लगभग सभी वस्तुओं की कीमत पर असर पड़ता है, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ जाती है। यानी सब्जियां, फल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
डिटर्जेंट, क्लीनर और पर्सनल केयर उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कई तत्व पेट्रोकेमिकल कच्चे माल से प्राप्त होते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से आमतौर पर इन उत्पादों की विनिर्माण लागत बढ़ जाती है। इसी तरह प्लास्टिक के घरेलू सामान जैसे बाल्टियां, बर्तन, बॉक्स, रसोई के उपकरण, बोतलें और अन्य घरेलू उत्पाद पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। पेट्रोकेमिकल की कीमतें बढ़ने पर निर्माता बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं।
बिस्किट, चिप्स, नूडल्स, खाद्य तेल और अन्य पैकेटबंद उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि निर्माताओं को बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का सामना करना पड़ रहा है और पैकेजिंग सामग्री भी पेट्रोकेमिकल्स से प्राप्त होती हैं। ईंधन की बढ़ती लागत से शिपिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ जाते हैं। कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पेट्रोलियम से बने प्लास्टिक और पुर्जे भी इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में मोबाइल फोन, घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे हो सकते हैं।

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