कोलकाता बंदरगाह का होगा विस्तार, केंद्र सरकार ने 215 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी

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नईदिल्ली, केंद्र सरकार ने कोलकाता बंदरगाह पर 215 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को मंजूरी दे दी है। राज्य में सरकार बदलने के बाद मिली इस मंजूरी को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अहम माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का उद्देश्य प्रति वर्ष 24.78 मिलियन टन की माल ढुलाई क्षमता का निर्माण करना है। ये निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह में निजी भागीदारी के जरिए किडरपोर डॉक-2को एक आधुनिक माल ढुलाई सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा। टर्मिनल बनने के बाद यहां से उर्वरक, खाद्यान्न, जिप्सम, लकड़ी और अन्य माल सहित कई प्रकार की वस्तुओं को संभालने की उम्मीद है, जिससे पूर्वी और उत्तरी भारत के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स प्रवेश द्वार के रूप में बंदरगाह की भूमिका मजबूत होगी।
एक अधिकारी ने कहा, आधुनिक लॉजिस्टिक्स अवसंरचना आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है। इस तरह की परियोजनाएं टर्नअराउंड समय को कम करती हैं, परिवहन लागत को घटाती हैं और उत्पादन केंद्रों तथा बाजारों के बीच संपर्क को बेहतर बनाती हैं। यह परियोजना डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत प्रस्तावित है, जो सरकारी खजाने पर बोझ डाले बिना बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर केंद्रित होगी।
वहीं, कोलकाता डॉक सिस्टम के नेताजी सुभाष डॉक में बड़े विकास कार्यों के लिए जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर को लेटर ऑफ अवॉर्ड प्रदान किया गया है। इस परियोजना की लागत करीब 832.25 करोड़ रुपये है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत डीबीएफओटी व्यवस्था में 30 वर्षों के लिए संचालित की जाएगी। परियोजना के तहत 2 नए बाहरी कंटेनर हैंडलिंग बर्थ विकसित किए जाएंगे, जबकि मौजूदा 5 बर्थों को आधुनिक बनाया जाएगा। पुरानी मोबाइल हार्बर क्रेनों को हटाकर आधुनिक क्रेनें लगाई जाएंगी।
कोलकाता बंदरगाह पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार हुगली के बालागढ़ में एक छोटा बंदरगाह बनाने पर भी विचार कर रही है। 1996 में बिजली संयंत्र बनाने के लिए किसानों से 1,100 एकड़ जमीन ली गई थी। इसमें से कुछ जमीन पोर्ट ट्रस्ट के पास भी है। परियोजना पर कुछ काम शुरू हुआ था, लेकिन साल 2000 की बाढ़ में सब तबाह हो गया। यहां गंगा नदी बंदरगाह के लिए प्राकृतिक रूप से उपयुक्त है।

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