जो अवसाद को उत्सव, अवसर व प्रसाद बना दे वही है योग: स्वामी चिदानन्द

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ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनायें देते हुये कहा कि आज अद्भुत संयोग है क्योंकि आज का दिन सबसे बड़ा दिन होता है, आज सदी का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण है और पिता दिवस भी है। उन्होेंने कहा कि पिता अपने बच्चों का रियल हीरो होता है, पिता अपने बच्चों और परिवार को छांव में रखने के लिये खुद धूप में रहता है, भारत में तो हर दिन ही फादर्स डे है। नन्हें प्यारे बच्चों के लिये तो पापा ही सहारा होते हंै, बचपन में भी और पूरे जीवन में भी, बच्चा जब पहला कदम उठाता है तब से लेकर जिन्दगी के हर समस्याओं का पिता के पास होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण का देश, दुनिया और जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। आज का सूर्यग्रहण तो सदी का सबसे बड़ा और विशेष सूर्यग्रहण है। आज का दिन हम सभी को जप, ध्यान और अपने श्रेष्ठ संकल्पों को याद करने का एक अद्भुत अवसर है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ’’आज सबसे लम्बा और विशाल दिन होता है, ऐसा ही दिल चाहिये। यही तो योग का प्रभाव है जो अवसाद को भी उत्सव बना दे, जो अवसाद को भी अवसर बना दे और जो अवसाद को भी प्रसाद बना दे उसी का नाम ही तो योग है। कोरोना काल में स्वस्थ और सुखी रहने का जादुई मंत्र है-योग। योग से हम स्वस्थ और सुखी रहने के साथ ही व्यस्त रहते हुये, मस्त रह सकते हंै। आज पूरा विश्व योगमय हो रहा है। योगा फॉर हेल्थ, योगा एट होेम, योगा फार ऑल। मुझे तो लगता है अब तो घर-घर योग, हर घर योग, हर घट योग, हर घाट पे योग। योग सदाबहार है, योग रामबाण है, योग संजीवनी है। योग से तन स्वस्थ और मन मस्त तथा स्थिर रहता है। इस कोरोना काल में शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये योग पॉवर बूस्टर का काम करता है और योग इम्यूनिटी बूस्टर है। योग, बाहर और भीतर दोनों तरह के वायरस से लड़ने की क्षमता रखता है। योग, तन की थकान और मन के तनाव को भी दूर करता है इसलिये मैं कहता हूँ योग करें। रोज करें और मौज करें। सारा खेल इम्यूनिटी का है, योग इज इम्यूनिटी बूस्टर, योग इज एन अमेजिंग बूस्टर। योग, ध्यान, प्राणायाम करके तो देखें। कुछ दिन तो करो योग, मिट जाएंगे सारे रोग। योग, भय में नहीं भाव में जीना सिखाता है। कोरोना से डरने की जरूरत नहीं बस सावधानी बरतें और नियमों का पालन करें बस हो गया।

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