केदारनाथ से कम नहीं धारचूला-मुनस्यारी की आपदा : हरीश रावत

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नैनीताल। धारचूला, मुनस्यारी, पिथौरागढ़ के आपदा प्रभावित गांवों का दौरा कर लौटे पूर्व सीएम रावत ने कहा प्रदेश और केंद्र सरकार को जल्द विषय विशेषज्ञों के साथ विभागीय अभियंताओं की टीम भेजकर सर्वे करना चाहिए। ताकि आपदा प्रभावित गांवों को पुनर्जीवित अथवा विस्थापित किया जा सके। कहा यहां की आपदा भी केदारनाथ जैसी आपदा से कम नहीं है। वह स्वयं भी क्षेत्रीय विधायक और जनप्रतिनिधियों के साथ प्रदेश के सीएम के समक्ष यह बात रखेंगे। पूर्व सीएम हरीश रावत ने नैनीताल राज्य अतिथि गृह में एक पत्रकार वार्ता में कहा सभी के सामने एक सवाल ही है कि आपदा प्रभावितों की सुरक्षा और उनका विस्थापन कैसे होगा। धारचूला, मुनस्यारी, पिथौरागढ़ में कई मकान मलबे में दबे हैं तो कई गोरी नदी में समा गए। वहीं भू-स्खलन से दर्जनों मकान झुक गए हैं, जो चिंता का विषय है। यहां आपदा भी केदारनाथ जैसी आपदा से कम नहीं है। यहां राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के साथ सर्वे कर पुनर्वास अथवा विस्थापन की रणनीति बनाए फिर उसका क्रियान्वयन करें।
कोरोना के नाम पर पंचायती व्यवस्था खत्म
पूर्व सीएम रावत ने कहा इस सरकार ने पंचायती राज खत्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं। पंचायतों को बल देने की बजाए जिला नियोजन समिति को खत्म किया जा रहा है। कोरोना का उपयोग कर पंचायती व्यवस्था का गला घोटा जा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायतों को कमजोर कर मनरेगा की ओढ़नी ओढ़कर जनता को धोखा दिया जा रहा है। जिससे गांव में विकास कार्य ठप हो गए हैं। कहा केरल में विधायक से ज्यादा शक्तिशाली ब्लॉक प्रमुख हैं, लेकिन हमारे प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था कमजोर हो रही है।
सरकार बताए डीडीए का चढ़ावा किस देवता को जाता है
पूर्व सीएम रावत ने कहा प्राधिकरण योजित विकास में नासूर है। यह छोटे लोगों के गले का फंदा और अन्य के लिये लूट का माध्यम बन गया है। डीडीए बनाकर प्रदेश में बहुमंजिला बिल्डिंग बनाई जा रही हैं। जबकि गरीब आदमी अपने भवन की चौखट तक नहीं बदल पा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा डीडीए के आला अफसर और नेताओं के लिए आय के साधन के सिवा कुछ नहीं। सरकार को बताना होगा इसका देवता कौन है। जिसके पास प्राधिकरण का चढ़ावा जाता है। प्राधिकरण बनने के बाद सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ा है। इस मौके पर पूर्व विधायक सरिता आर्या, पूर्व दर्जा मंत्री डा.रमेश पांडे, हेम आर्या, खष्टी बिष्ट, हेम, गुड्डू खान, अनुपम कबडवाल, धीरज भट्ट आदि थे।

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