गोवंश के हमलों में कई लोग गंवा चुके जान, राहगीरों से लेकर किसानों तक की बढ़ी परेशानी
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : शहर की सड़कों पर बढ़ती निराश्रित गोवंश की संख्या लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। सड़कों से लेकर गलियों और पुलों तक गोवंश के झुंड नजर आ रहे हैं। आए दिन गोवंश राहगीरों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। कुछ मामलों में लोगों की जान तक जा चुकी है, इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर गोवंश संरक्षण के लिए अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़कों पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

शहर में निराश्रित गोवंश की बढ़ती संख्या से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। सड़क के बीचोंबीच बैठे गोवंश के कारण जाम की स्थिति बन रही है। वहीं, अचानक सड़क पर आ जाने या राहगीरों पर हमला करने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। गलियों में घूम रहे गोवंश के कारण बच्चों और बुजुर्गों को भी घर से बाहर निकलने में परेशानी हो रही है। शाम के समय नदी पर बने पुलों पर गोवंश के झुंड बैठे दिखाई देते हैं। रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे गोवंश वाहन चालकों को नजर नहीं आते, जिससे हादसों की आशंका और बढ़ जाती है। शहर में निराश्रित गोवंश के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कुछ माह पूर्व जौनपुर क्षेत्र में घर के बाहर खड़े एक व्यक्ति पर गोवंश ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ दिन बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी तरह बालासौड़ मुख्य मार्ग पर भी गोवंश ने एक व्यक्ति पर पीछे से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। काशीरामपुर तल्ला क्षेत्र में भी गोवंश के हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया था। उसे बेस अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, पटेल मार्ग पर सब्जी खरीद रही एक महिला पर भी गोवंश ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल महिला को उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बावजूद शहर में निराश्रित गोवंश की समस्या बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते तो ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती थी।
किसानों की फसलों को भी पहुंच रहा नुकसान
निराश्रित गोवंश केवल राहगीरों के लिए ही खतरा नहीं बन रहे, बल्कि किसानों की परेशानी भी बढ़ा रहे हैं। रात के समय गोवंश खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे काश्तकारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भाबर और सनेह क्षेत्र में यह समस्या अधिक गंभीर बनी हुई है। रात के अंधेरे में सड़कों पर बैठे गोवंश के कारण वाहन चालकों को भी खतरा बना रहता है।
पशुपालकों की लापरवाही पर कार्रवाई की जरूरत
स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायत सामने आती रही है कि कुछ पशुपालक दूध देना बंद करने या अनुपयोगी होने पर अपने गोवंश को सड़कों पर छोड़ देते हैं। ऐसे पशु धीरे-धीरे निराश्रित गोवंश के झुंड का हिस्सा बन जाते हैं। इसके बावजूद पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रभावी पहल की जरूरत महसूस की जा रही है। समस्या के समाधान के लिए नगर निगम और पशुपालन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ गोवंश के संरक्षण, पशुपालकों की पहचान और नियमित निगरानी की व्यवस्था जरूरी है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और बेजुबान पशुओं को भी सुरक्षित आश्रय मिल सके।