माल्या की संपत्ति वसूली से खत्म नहीं होगा धनशोधन का आपराधिक मामला

Spread the love

-प्रवर्तन निदेशालय का बंबई उच्च न्यायालय में जवाब, कहा—बैंकों की रकम वसूली दीवानी प्रक्रिया, अपराध से अलग
मुंबई ,। प्रवर्तन निदेशालय ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ चल रहे धनशोधन मामले को लेकर बंबई उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण रुख स्पष्ट किया है। निदेशालय ने कहा कि बैंकों द्वारा माल्या से बकाया रकम की वसूली हो जाने मात्र से उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई समाप्त नहीं हो जाती। एजेंसी के अनुसार, बकाया रकम की वसूली एक दीवानी प्रक्रिया है, जबकि माल्या के खिलाफ दर्ज अनुसूचित अपराध और धनशोधन के मामले आपराधिक प्रकृति के हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने अधिवक्ता आशीष मेहता के माध्यम से अदालत में अपना जवाब दाखिल किया। इसमें कहा गया कि भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह द्वारा की गई वसूली का संबंध माल्या की वित्तीय देनदारी से है। इसका यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि उनके खिलाफ धनशोधन का अपराध स्वत: समाप्त हो गया।
एजेंसी ने अदालत से कहा कि बैंकों द्वारा रकम की वसूली से केवल बकाया राशि की गणना प्रभावित होती है। इससे यह तय नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति ने धनशोधन का अपराध किया था या नहीं।
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि मुंबई की विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम अदालत के आदेश के बाद विजय माल्या की करीब 14,131.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को सौंपी जा चुकी हैं।
एजेंसी के मुताबिक, यह प्रक्रिया संपत्तियों पर वैध अधिकार रखने वाले पक्ष को उनका धन वापस दिलाने की कानूनी व्यवस्था का हिस्सा है। संपत्तियों की वापसी को माल्या के लिए किसी तरह की निर्दोषता या कानूनी राहत नहीं माना जा सकता।
निदेशालय ने कहा कि किसी अपराध के बाद संपत्ति की वसूली या वापसी हो जाने से कथित तौर पर पहले किया गया अपराध समाप्त नहीं हो जाता।
यह मामला विजय माल्या की ओर से बंबई उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद सामने आया। माल्या ने अपने खिलाफ लंबे समय से चल रहे मामलों को समाप्त करने की मांग की है।
माल्या की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल की दीवानी देनदारियां पूरी तरह चुकाई जा चुकी हैं। उनका दावा है कि भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह ने ब्याज सहित करीब 6,203 करोड़ रुपये के मूल दावे के मुकाबले अब तक लगभग 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत के समक्ष माल्या के भारत से लगातार बाहर रहने के आचरण को भी प्रमुखता से रखा। एजेंसी ने कहा कि माल्या भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और उन्हें राहत देने के किसी भी फैसले में उनके इस आचरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
माल्या वर्ष 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।
प्रवर्तन निदेशालय का जवाब सुनने के बाद बंबई उच्च न्यायालय ने विजय माल्या से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वह भारत लौटने और यहां की कानूनी व्यवस्था के समक्ष आत्मसमर्पण करने का इरादा रखते हैं।
अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत माल्या के रुख पर विचार करेगी। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में धन की वसूली हो जाने के बावजूद क्या माल्या के खिलाफ चल रही आपराधिक और धनशोधन संबंधी कार्यवाही को समाप्त किया जा सकता है। प्रवर्तन निदेशालय का स्पष्ट मत है कि वित्तीय वसूली और आपराधिक जिम्मेदारी दो अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *