व्यापार बढ़ाना है तो बाजारों तक पहुंच को आसान और सरल बनाएं: ब्रिक्स देशों से बोले, पीयूष गोयल

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नई दिल्ली ,। भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की अपील करते हुए सुरक्षित एवं विविध आपूर्ति श्रृंखला तथा बाजारों तक खुली पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार किसी भी सदस्य देश के आर्थिक विकास और लोगों के कल्याण के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिक्स को अपने उत्पादों के लिए एक बड़े और महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखता है तथा एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंच को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया के कुल व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई यानी 25 प्रतिशत है। ऐसे में आपसी व्यापार को बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
भारत के विनिर्माण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के विनिर्माण निर्यात में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की ‘फार्मेसीÓ के रूप में भी जाना जाता है और औषधि क्षेत्र में देश की मजबूत क्षमता है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स इन उत्पादों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार है। भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपने उत्पादों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना चाहता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को मजबूत, सुरक्षित और विविध आपूर्ति श्रृंखला पर आधारित बनाने की जरूरत है। इसके लिए सदस्य देशों को कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों सहित एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए।
गोयल ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला तभी मजबूत हो सकती है, जब व्यापार दोनों दिशाओं में समान रूप से आगे बढ़े। उन्होंने गैर-शुल्क संबंधी उपायों को भी व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बताया। उनके अनुसार, 88 प्रतिशत देशों के लिए गैर-शुल्क उपाय यानी कर के अतिरिक्त लागू किए जाने वाले नियम निर्यात की लागत को वास्तविक कर से भी काफी अधिक बढ़ा देते हैं।
उन्होंने ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से बाजारों तक पहुंच को अधिक सरल बनाने, सरकारी नियमों एवं प्रक्रियाओं को आसान करने तथा व्यापारिक वस्तुओं को तेजी से मंजूरी देने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों को कृषि-प्रौद्योगिकी से जुड़े नवोदित उद्यमों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि वे खाद्य सुरक्षा के लिए सदस्य देशों के किसानों के साथ मिलकर नए समाधान विकसित कर सकें।
उन्होंने सेवा क्षेत्र में भी आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पेशेवरों को एक देश से दूसरे देश आने-जाने में आसानी होनी चाहिए तथा सदस्य देशों को एक-दूसरे की पेशेवर डिग्रियों और योग्यताओं को सरलता से मान्यता देने की दिशा में काम करना चाहिए।
ब्रिक्स देशों की आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की वकालत करते हुए गोयल ने कहा कि भारत में 1.40 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त नवोदित उद्यमों में कम से कम एक महिला साझेदार या निदेशक है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में वितरित किए गए छोटे ऋणों में करीब दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने, स्वतंत्र बनने और आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में नई दिल्ली में ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन की बैठक हुई थी। गोयल ने महिलाओं के नेतृत्व वाली कंपनियों को ब्रिक्स की प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और अन्य कारोबारी अवसरों में अधिक भागीदारी दिलाने की अपील की।
डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली के माध्यम से एक वर्ष में 25 हजार करोड़ से अधिक लेनदेन होते हैं। उन्होंने कहा कि यह दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन के आधे से भी अधिक हैं। भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली को वर्तमान में दुनिया के 11 देशों में स्वीकार किया जाता है।

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