भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र के प्रसंग सुनाएं, भजनों व धार्मिक प्रसंगों पर श्रद्धालु दिखे भावविभोर
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार के काशीरामपुर, नजीबाबाद रोड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। कथा व्यास वेदाचार्य आचार्य देवी प्रसाद भट्ट ने श्रद्धालुओं को निष्काम भक्ति का संदेश देते हुए कहा कि भगवान की भक्ति जब किसी स्वार्थ या सांसारिक लालसा से मुक्त होकर की जाती है, तभी उसका वास्तविक फल प्राप्त होता है। निष्काम भक्ति मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ ही उसके जीवन का कल्याण करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

कथा के दौरान आचार्य भट्ट ने भगवान श्रीहरि के भक्त ध्रुव के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव ने दृढ़ संकल्प और अटूट भक्ति के बल पर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और ध्रुव पद प्राप्त किया। ध्रुव की कथा से श्रद्धालुओं को लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने और विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिली। इसके साथ ही कथा व्यास ने समुद्र मंथन की रोचक एवं आध्यात्मिक कथा का वर्णन करते हुए देवताओं और असुरों द्वारा किए गए मंथन तथा उससे निकले विभिन्न रत्नों और भगवान विष्णु की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान के 24 अवतारों की कथा भी सुनाई और उनके माध्यम से धर्म, सत्य तथा लोककल्याण के संदेश को सामने रखा। संगीतमय भागवत कथा के दौरान भजनों और धार्मिक प्रसंगों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। कथा पंडाल में पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर कथा आयोजक वीके जुयाल, सुधीर दुदपुड़ी, महेश जुयाल, मनीष जोशी, योगेश रतूड़ी, अंकित धस्माना, गिरीश कंडवाल, मुकेश पंत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।