जयंती पर साहित्यकार अबोध बंधु बहुगुणा को किया याद

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार: गढ़वाली और हिन्दी भाषा के साहित्यकार अबोध बंधु बहुगुणा की 95 वीं जयंती पर बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान सदस्यों ने ‘अबोध के साहित्य का बोध’ पर भी चर्चा की। कहा कि अबोध बंधु बहुगुणा के साहित्यों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
दिल्ली के पूर्वी विनोद नगर स्थित स्यारा रिटेल्स में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बुरांस साहित्य एवं कला केन्द्र के अध्यक्ष साहित्यकार व पत्रकार प्रदीप वेदवाल ने बहुगुणा को गढ़ साहित्य का पुरोधा साहित्यकार बताया। इस अवसर पर कवि वेदवाल ने बहुगुणा के तिडका संग्रह से कवि अबोध के अनमोल तिडकों का वाचन भी किया। चक्रचाल नाटक संग्रह के नाटकों का उल्लेख करते हुए वेदवाल ने कहा कि आज के दौर में चक्रचाल के नाटकों को प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। स्यारा रिटेल्स के प्रमोटर और संस्कृति प्रेमी दीपक ध्यानी ने अबोध बंधु बहुगुणा के भुम्याल़ को गढ़ साहित्य की कालजयी रचना बताते हुए भुम्याल़ में से कविता पाठ किया। अनुप्रास अलंकार के उद्धरणों को प्रस्तुत करते हुए ध्यानी ने कहा कि भुम्याल़ को जितनी बार भी पढ़े हर बार मन-मस्तिष्क में बौद्धिक ऊर्जा का संचार होता है। गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चंद्र घिल्डियाल ने साहित्यकार अबोध बंधु बहुगुणा के दौर को याद करते हुए कहा कि बहुगुणा जी का लेखन बहुमुखी प्रतिभा से परिपूर्ण था। उन्होंने हिन्दी के साथ-साथ गढ़वाली भाषा में गद्य एवं पद्य की दोनों विधाओं में उत्कृष्ट लेखन किया है। इस अवसर पर पहली गढ़वाली फिल्म जग्वाल़ के निर्माता और नायक साहित्यकार पारेश्वर गौड़ ने कनाडा से अपना आडियो संदेश भेजकर अबोध बंधु बहुगुणा के साथ बिताए दिनों और गढ़वाली भाषा में अबोध बंधु बहुगुणा के साहित्यिक योगदान को याद किया। जबकि वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने अबोध बंधु बहुगुणा के अप्रकाशित साहित्य को संकलित करने की बात कही। राज्य सभा सचिवालय में अतिरिक्त निदेशक के पद पर तैनात मीना कंडवाल,लेखिका प्रीति रमोला गुसाईं ‘मृणालनी,रंगकर्मी सुनीता खर्कवाल,धुयाल़ लोकसंगीत के अध्यक्ष गोपाल नेगी,साहित्य और संस्कृति प्रेमी अमित चौहान,विश्वेश्वरी रावत,गरिमा सुन्द्रियाल ने साहित्यकार अबोध बंधु बहुगुणा को श्रद्धांजलि दी।

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