जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के तत्त्वाधान में ऐकडेमिक सेंटर चौरास परिसर में हिमालय है तो हम हैं शीर्षक पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता प्रो. आर.के. मैखुरी ने हिमालय की जैव विविधताएं, प्राकृतिक संपदा एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों पर विचार रखते हुए सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर जोर दिया। मुख्य अतिथि चंदन सिंह बिष्ट ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

संगोष्ठी में डॉ. कविता भट्ट ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शौधार्थियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। कविता ने वैदिक ऋचा का संदर्भ देते हुए बताया कि हिमालय से ही हिन्दुस्थान का अस्तित्व और विशिष्ट पहचान है। डॉ. धीरज कुमार शर्मा ने संगोष्ठी के उद्देश्य एवं हिमालय संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. हरिभजन सिंह चौहान ने हिमालय के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वाई.पी रेवानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर एम.एस. पंवार ने युवा पीढ़ी से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। प्रो. महावीर सिंह नेगी ने हिमालयी क्षेत्र और वहां के लोगों के सामने बढ़ते पर्यावरणीय संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया। संगोष्ठी में हिमालय के सतत संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए इसकी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का संदेश प्रमुखता से उभरा।