जम्मू-कश्मीर, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 2019 के घातक आतंकी हमले की साजिश रचने वाला मुख्य आतंकवादी अरजुमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान मारा गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फरबाद में गोलियों से भून दिया। हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है। हमजा बुरहान के शव को कब्जे में ले लिया गया है और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हमजा को अर्जुमंद गुलजार डार नाम से भी जाना जाता था। वो पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। बताया जाता है कि वह करीब 7 साल पहले वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान गया था। वहां वो आतंकी संगठन अल-बद्र से जुड़ गया। इस संगठन को भारत सरकार ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। बाद में वो संगठन में कमांडर के तौर पर काम करने लगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार, हमजा पुलवामा में विस्फोटक बरामदगी, 2020 में सीआरपीएफ जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा। उसने पुलवामा आतंकी हमले के दौरान ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के रूप में भी काम किया था। वह खुद को पाकिस्तान में शिक्षक बताता था और कथित तौर पर पहचान छिपाने के लिए एक स्कूल में पढ़ाता भी था। वो आतंकियों की सीमा पार कराने में भी मदद करता था।
सूत्रों ने सूत्रों के हवाले से कहा कि हमजा ने अल-बद्र द्वारा स्थानीय युवाओं की भर्ती करने और कश्मीर में भारत विरोधी प्रचार फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पोस्टर, वीडियो और ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री को बनाने और वितरित करने में अहम भूमिका निभाई। उसके काम को आतंकी संगठन की ‘नेरेटिव युद्ध’ रणनीति के लिए अहम माना जाता था, जिसका उद्देश्य उग्रवाद को महिमामंडित करना और कमजोर युवाओं को प्रभावित करना था।
भारत ने 2022 में हमजा को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंकी घोषित किया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा पुलवामा और दक्षिण कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और आतंकवाद के लिए आर्थिक सहायता जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। उस पर आरोप था कि वह पाकिस्तान से बैठकर स्थानीय ओजीडब्ल्यू के जरिए हथियार, फंडिंग और निर्देश पहुंचाता था। वो अल-बद्र से जुड़े सीमा पार अभियानों से भी जुड़ा था।
14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में जम्मू और श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। आतंकियों ने विस्फोटक से भरी कार को जवानों के काफिले से टकरा दी थी, जिससे भीषण हमले में जवानों और वाहन के चीथड़े उड़ गए थे। घटना की जांच करने वाली एजेंसियों ने हमले की साजिश के तार पाकिस्तान से जोड़े थे। वह भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था।