पूर्वजों के बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए

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जयन्त प्रतिनिधि।
सतपुली।
राजकीय महाविद्यालय सतपुली में देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत व देश भक्त गीत और स्वतंत्रता संग्राम पर अपने विचारों को रखा।
विचार गोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्या डॉ. संजय कुमार ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दांडी मार्च यात्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन अंग्रेजों को नमक के साले कानून के खिलाफ किये गए आंदोलन के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन प्राध्यापक डॉ. संत कुमार ने किया। कार्यक्रम प्राध्यापक डॉ. आर के त्यागी, डॉ. राकेश इस्टवाल, डॉ. पूजा ध्यानी, डॉ. अवधेश उपाध्याय, डॉ. दीप्ति माहेश्वरी सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
भक्त दर्शन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जयहरीखाल में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत प्राणी विज्ञान विभाग के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक कुकरेती ने आजादी के आंदोलन की पृष्ठभूमि, आंदोलन के कारण एवं उसके प्रभाव के बारे में बताते हुए कहा कि कैसे गांधी ने जनमानस में अपने प्रभाव को अपने आचरण के माध्यम से स्थापित किया। प्राचार्या प्रो. मामचन्द्र ने बताया कि देश लगभग आठ सौ वर्षों तक गुलाम रहा। देश को आजाद कराने के लिए पूर्वजों ने बलिदान दिया। हमें अपने पूर्वजों के बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरके द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम में प्रो. एसपी मधवाल, प्रो. मनोज यादव, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. डीसी बेबनी, डॉ. डीसी मिश्रा, श्रीमती कृतिका क्षेत्री, अर्चन नौटियाल, डॉ. कमल कुमार, डॉ. पंकज बहुगुणा, डॉ. संजय मदान, विनीत सिंह, डॉ. भुवन भाष्कर आदि मौजूद थे।

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