कोटद्वार-पौड़ी

पहाड़ में हुई बारिश, मालन नदी का चढ़ा जलस्तर

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मालन नदी का पुल ढहने के बाद से लगातार हो रही है परेशानी
नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों ने मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग से की आवाजही
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : मालन पुल को टूटे हुए 11 माह से अधिक का समय हो चुका है। लेकिन, अब तक मरम्मत कार्य पचास प्रतिशत भी नहीं हो पाया है। नतीजा इस वर्ष फिर बरसात ने भाबर वासियों की समस्याएं बढ़ानी शुरू कर दी है। अब तक धराशायी पुल के समीप से ही वैकल्पिक मार्ग तैयार कर आवाजाही की जा रही थी। लेकिन, बुधवार को अचानक बढ़े नदी के जलस्तर ने उक्त वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही पर विराम लगा दिया। ऐसे में लोगों को लंबा घूमकर मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग से आवागमन करना पड़ा। लेकिन, इस मार्ग की स्थिति भी ठीक नहीं है। मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे आमजन की कमर तोड़ रहे हैं।
13 जुलाई को कोटद्वार से भाबर को जोड़ने वाला मालन नदी पर बना पुल धराशायी हो गया था। पुल टूटने के बाद भाबर क्षेत्र में रहने वाली करीब पचास हजार की आबादी प्रभावित हो गई थी। सरकारी सिस्टम ने आनन-फानन में मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग को आवागमन के लिए तैयार किया। लेकिन, उक्त मार्ग पर भी कई चुनौतियां थी। बदहाल मार्ग आवागम करने वालों के लिए मुसीबत बन रहा था। साथ ही यह काफी लंबा भी पड़ रहा था। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने धराशायी पुल के समीप ही नदी में वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया। लेकिन, वर्तमान में हो रही बारिश से नदी में वाहन उतारना भी खतरे से खाली नहीं है। पहाड़ों में हो रही बारिश से नदी कभी भी उफान पर बन रही है। बुधवार दोपहर पहाड़ों में हो रही बारिश से नदी का जल स्तर बढ़ गया था। ऐसे में लोगों को मवाकोट-कण्वाश्रम से आवागमन करना पड़ा। भाबर वासियों का आरोप है कि वह पिछले कई माह से पुल मरम्मत कार्य में तेजी लाने की मांग उठा रहे थे। लेकिन, सरकारी सिस्टम कछुआ चाल से मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। ऐसे में इस वर्षाकाल में भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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