राड्स संस्था ने ग्रामीणों को बांटे रोजमेरी की पौधे

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नई टिहरी। ग्रामीणों को रोजमेरी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राड्स संस्था की ओर से कालिंका स्वंय सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजमेरी की पौध वितरित की गई। जड़ी-बूटी संस्थान के ट्रेनर हरीश डोभाल ने ग्रामीणों को रोजमेरी पौधों रोपण तथा देखभाल के बारे में जानकारी दी। रोजमेरी गुणकारी होने के कारण बाजार में इसकी खूब मांग है। रोजमेरी की खेती कर स्वयं सहायता समूह से जुड़े किसान अपनी आय बढ़ा सकते है। राड्स संस्था के सुशील बहुगुणा ने बताया कि रोज़मेरी का पौधा औषधिया गुणों से भरपूर है, इसे आम भाषा में गुल मेंहदी कहा जाता है। रोज़मेरी का पौधा दो से तीन फीट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां तीन से चार सेमी. लंबी होती है, पत्तियों से सुगन्धित तेल निकाला जा सकता है, जिसमें मुख्य रसायन साइनिआल होता है। इत्र बनाने में इसका खूब प्रयोग होता है। रोजमेरी के सूखी पत्तियों का प्रयोग खाद्य पदार्थों जैसे पिज्जा आदि में किया जाता है। एक नली में रोजमेरी की खेती करने वाला किसान साल में कम से कम दो बार इसकी फ़सल का उत्पादन कर पचास हजार से साठ हजार रुपये कमा सकता है। इसकी खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते है। संस्था की ओर से कालिंका स्वयं सहायता समहू से जुड़े मदन लाल, सुमित्रा देवी, सुनीता देवी, गोदाबंरी देवी, रजनी देवी, मंजू देवी, सुलोचना देवी, सुनीता, राजकुमारी, विमला देवी, हेमलता, लक्ष्मी, आरती देवी को करीब पांच पौध वितरित किए गए। मौके पर धर्मेंद्र पंवार कुम्भी बाला भट्ट, लक्ष्मी उपस्थित थे।

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