हल्द्वानी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (नेशनल मेडिकल काउंसिल) ने रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2026-27 के शैक्षिक सत्र के लिए एमबीबीएस की मान्यता देने से इंकार कर दिया है। दोनों कॉलेजों ने 100-100 एमबीबीएस सीटों के लिए आवेदन किया था। एनएमसी ने फैकल्टी, संसाधनों और निर्माण कार्य में खामियां बताते हुए मान्यता रोक दी है। दोनों मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के लिए 2020 से कार्रवाई चल रही थी। अब 15 दिन के भीतर फिर से आवेदन कर अंडरटेकिंग देनी होगी। इसमें कॉलेज प्रशासन को एनएमसी को यह संतुष्ट करना होगा कि निर्धारित समय में फैकल्टी पूरी कर ली जाएगी और निर्माण कार्य भी पूरे कर दिए जाएंगे। इसी शर्त पर मान्यता मिल सकती है।
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 13 फैकल्टी
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. ऊषा रावत के अनुसार कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी है। वर्तमान में 13 फैकल्टी ही उपलब्ध हैं। एनएमसी ने प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद खाली होने पर आपत्ति जताई है। इसके अलावा संसाधनों और निर्माण कार्यों को लेकर भी कमियां बताई गई हैं। लैब, लाइब्रेरी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं अभी मानकों के अनुसार पूरी नहीं हैं।
पिथौरागढ़ में 85 के सापेक्ष सिर्फ 6 फैकल्टी
पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एके सिंह ने बताया कि यहां सबसे बड़ी समस्या प्रयोगशालाओं के निर्माण न होने और फैकल्टी की कमी है। एनएमसी के मानक के अनुसार 85 फैकल्टी चाहिए, लेकिन अभी केवल 6 फैकल्टी ही कार्यरत हैं। प्रो. सिंह ने कहा, डॉक्टरों के ट्रांसफर हो जाने से फैकल्टी में कमी हुई है। प्रयोगशालाओं का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। इन्हीं कारणों से मान्यता नहीं मिल पाई। अब दोनों कॉलेज 15 दिन के भीतर एनएमसी को दोबारा प्रस्ताव भेजेंगे। इसके साथ अंडरटेकिंग दी जाएगी कि तय समय सीमा में सभी कमियां दूर कर दी जाएंगी।