सत्ता में आते ही भाजपा एनएचएम कर्मचारियों को भूली

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कोटद्वार। कोरोना महामारी से बचाव व रोकथाम के लिए जूझ रहे एनएचएम कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2017 में कर्मचारियों ने 19 दिनों तक आंदोलन किया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने तत्कालीन प्रदेश सरकार पर कर्मचारियो की उपेक्षा का आरोप लगाया था। सत्ता में आते ही भाजपा एनएचएम कर्मचारियों को भूल गई है। कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से 2017 में शासन को भेजे गये नियमितिकरण के प्रस्ताव के अनुरूप कर्मचारियों का नियमितिकरण करने, केन्द्र द्वारा घोषित 15 प्रतिशत परफॉरमैंस बोनस का लाभ कर्मचारियों को देने, हरियाणा की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों पर सेवा नियमावली लागू करने की मांग की है।
संगठन के जिलाध्यक्ष शरद रौतेला ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से भी अधिक समय से कार्य कर रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों की सरकार अनदेखी कर रही है। जबकि ये कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कहे जाते है, लेकिन सरकार को इन कर्मचारियों के भविष्य व परिवार की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में एनएचएम कर्मचारियों को 15 फीसदी परफॉरमेंस बोनस दिया, लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कर्मचारियों के हित में निर्णय नहीं लिया है। वर्तमान में कोरोना वैश्विक महामारी में एनएचएम में कार्यरत कर्मचारी 24 घंटे सेवायें प्रदान कर रहे है, लेकिन हमें कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में ही नहीं रखा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार पिछले तीन वर्ष से कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है। सरकार आज तक कर्मचारियों के लिए न किसी प्रकार की मानव संसाधन नीति बना पाई है। इसके विपरीत अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की नीति बनाई जा रही है। शरद रौतेला ने कहा कि कोरोना संक्रमण में पूीरी निष्ठा से कार्य कर रहे इन कर्मचारियों के हित में यदि राज्य सरकार किसी भी प्रकार का सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो कर्मचारी अपना विरोध दर्ज करेगें। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। संविदा कर्मचारी दीप सौरभ ने आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में जो भी लाभ दिये जाते है वो लाभ राज्य सरकार कर्मचारियों को नहीं देती है। उन्होंने कहा कि कोरोना सेवा में मिलने वाले प्रत्येक लाभ से कर्मचारियों को वंचित रखा गया है।

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