शहादत दिवस पर किया शौर्य चक्र विजेता चंदन सिंह भंडारी को नमन

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द्वाराहाट। देश की आन, बान व शान की खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले जांबाज शौर्य चक्र विजेता चंदन सिंह भंडारी को शहादत दिवस पर नमन किया गया। इस वीर सपूत ने 24 वर्ष पूर्व जम्मू कश्मीर में विशेष ऑपरेशन के दौरान घायल होने के बावजूद आतंकियों को ढेर कर वीरगति प्राप्त की थी। कुमाऊं रेजिमेंट मुख्यालय रानीखेत व नागा रेजिमेंट की ओर से पुष्पचक्र अर्पित किए गए। बगवालीपोखर में शुक्रवार को माहौल भावुक, लेकिन हरेक का सीना गर्व से चौड़ा था। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष उमा सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक मदन बिष्ट व पुष्पेश त्रिपाठी, पूर्व सैनिक लीग अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी आदि ने बारी-बारी शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। जिपं अध्यक्ष उमा सिंह ने कहा कि बलिदानी सपूत की गौरवगाथा इतिहास हमेशा याद रखेगा। शौर्य चक्र विजेता चंदन सिंह ने देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की जो प्रेरणा दी है, वह युवा हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता रहेगा। उन्होंने शहीद की वीरमाता शांति देवी तथा भाभी जानकी देवी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। साथ ही स्मारक के सुंदरीकरण की भी घोषणा की। इस मौके पर भूपाल सिंह भरड़ा, मोहन सिंह बिष्ट, ललित मोहन सिंह नेगी, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, विनोद अधिकारी, जीवन परिहार, बसंत अधिकारी, प्रेमा देवी, मुन्नी देवी आदि मौजूद रहीं।
गोलियां लगने पर भी नहीं छोड़ा था मोर्चा
भंडरगांव के जांबाज चंदन सिंह भंडारी 17 अप्रैल 1995 को रानीखेत स्थित कुमाऊं रेजीमेंट मुख्यालय से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। 1996 में उन्हें आठ-कुमाऊं रेजिमेंट की 19वीं बटालियन में जम्मू कश्मीर में तैनाती मिली। 1997 में आतंकवादियों की घुसपैठ की सूचना पर सर्च आपरेशन के दौरान चंदन ने पीछाकर आतंकियों पर हमला किया। मुठभेड़ के दौरान गोलियां लगने से चंदन सिंह घायल हो गए। मगर देश के दुश्मनों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखा। कुल नौ आतंकवादी मार गिराने के बाद 19 मार्च 1997 को देश के लिए बलिदान दिया। तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वेदप्रकाश मलिक ने मरणोपरांत चंदन सिंह को शौर्य चक्र से अलंकृत किया। देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर सपूत की याद में तब से बगवालीपोखर में हर वर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है।

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