शिविर में ग्रामीण पहुंचे, जिम्मेदार अधिकारी पहुंचना भूले

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नैनबाग (टिहरी)। यमुना नदी पर प्रस्तावित 300 मेगावाट लखवाड़ बांध परियोजना से प्रभावित काश्तकारों के भूमि अभिलेखों के सत्यापन के लिए बृहस्पतिवार को नैनबाग तहसील में लगाया गया शिविर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से खानापूर्ति साबित हुआ।
दस्तावेज लेकर शिविर में पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि तहसील प्रशासन और यूजेवीएनएल के जिम्मेदार अधिकारी शिविर में नहीं पहुंचे जिससे वे अपनी समस्याएं और मुआवजे से जुड़े मामले अधिकारियों के सामने नहीं रख पाए। ग्रामीणों ने शिविर को महज खानापूर्ति बताते हुए रोष जताया। लखवाड़ परियोजना के लिए अर्जित भूमि से संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के लिए मरोड़, मेलगढ़, टटोर, खरसोन, खैराड़ और घिल्डिचक गांवों के काश्तकार नैनबाग तहसील सभागार पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि शिविर में प्रशासन और यूजेवीएनएल के अधिकारी मौजूद रहेंगे। भूमि व परिसंपत्तियों से जुड़े लंबित मामलों पर बात होगी लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं पहुंचने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीण शरण सिंह पंवार, विक्रम कैंतुरा, देशपाल पंवार, कैलाश बिजल्वाण, गंभीर सिंह रावत ने आरोप लगाया कि प्रशासन प्रभावित काश्तकारों से बार-बार भूमि के दस्तावेज और शपथपत्र मांग रहा है जबकि उनकी भूमि से संबंधित अभिलेख तहसील में पहले से मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेज जमा कराने के बावजूद परिसंपत्तियों के मुआवजे और अन्य समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में भी कई बार प्रभावितों से दस्तावेज मांगे जा चुके हैं। इसके बावजूद शिविर में अधिकारियों के नहीं पहुंचने से वे अपनी बात रखने से वंचित रह गए। यूजेवीएनएल की ओर से कुछ कर्मचारी शिविर में पहुंचे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी में शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गया।
शिविर में मिजान सिंह रावत, अर्जुन रावत, बचन सिंह रावत, सरदार सिंह रावत, विक्रम कैंतुरा, पीतांबर दत्त, प्रदीप, मयंक बिजल्वाण, कैलाश, गोपाल दत्त, सवया देवी, राजेंद्र नौटियाल आदि मौजूद रहे।

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