श्रमिक कार्ड के नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया से स्वास्थ्य जांच से वंचित रह गए मजदूर

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पश्चिमी झंडीचौड़ के वार्ड नंबर 37 स्थित पंचायत घर में बुधवार को मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की गई, लेकिन श्रमिक कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने के कारण कई मजदूर जांच से वंचित रह गए। इससे नाराज श्रमिकों ने श्रम विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए।


पार्षद सुखपाल शाह की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में चिकित्सक डा. मयंक, टीम लीडर मनोज तिवारी, श्रम विभाग के राजू सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। शिविर के दौरान स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे कई श्रमिकों को नवीनीकरण नहीं होने के कारण सुविधा नहीं मिल पाई। पार्षद सुखपाल शाह ने कहा कि झंडीचौड़ क्षेत्र में 80 प्रतिशत से अधिक आबादी गरीब किसानों और मजदूरों की है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक हैं, जो खेतों, मकानों और लोगों के घरों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इसके बावजूद श्रमिक कार्ड के नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया के कारण कई पात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग की ओर से श्रमिक कार्ड के नवीनीकरण के लिए ठेकेदार और संबंधित अवर अभियंता (जेई) की मुहर लगाने की शर्त रखी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में असंगठित रूप से काम करने वाले मजदूरों के लिए इन औपचारिकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वास्तविक श्रमिक भी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। सुखपाल शाह ने श्रम विभाग से मांग की कि पूर्व में ग्राम प्रधानों की ओर से श्रमिकों को प्रमाणित करने की व्यवस्था की तर्ज पर पार्षदों को भी यह अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि पार्षद की ओर से श्रमिक होने का प्रमाण देने और संबंधित व्यक्ति का शपथ पत्र लेने के बाद श्रम विभाग को श्रमिक कार्ड का नवीनीकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के हित में कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण जरूरतमंद लोग इनका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। स्वास्थ्य जांच शिविर में भी कई श्रमिकों को निराश होकर लौटना पड़ा। उन्होंने विभाग से नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल बनाने और पात्र मजदूरों को स्वास्थ्य जांच सहित अन्य सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही कहा कि नियमों में आवश्यक सरलीकरण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में असंगठित रूप से काम करने वाले मजदूरों को राहत मिल सकेगी।

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