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राम मंदिर का शिल्पकार सोमपुरा परिवार: 34 साल पहले कदमों से मापा था गर्भगृह, पेंसिल स्केच से शुरू किया काम

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नई दिल्ली , एजेंसी। अयोध्या नगरी अपने आराध्य के आगमन की प्रतीक्षा में है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा से नगरी में उमंग और उत्सव का माहौल है। चौराहों-दीवारों को मनोभावन बनाने के लिए इन पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। मंदिर बनाते समय इसकी वास्तुकला से लेकर सुरक्षा जैसे सभी अहम पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है। मंदिर का डिजाइन सोमपुरा परिवार ने तैयार किया है, जिसकी पीढ़ियां ऐसे कामों के लिए भारत समेत दुनियाभर में मशहूर हैं। आइये जानते हैं सोमपुरा परिवार के बारे में…
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई थी। भूमि-पूजन के साथ ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर के पहले चरण का आधिकारिक तौर पर निर्माण शुरू हुआ। 18,000 करोड़ रुपये में बनने वाले राम मंदिर के लिए डिजाइन गुजरात से आने वाले सोमपुरा परिवार ने तैयार किया। इस परिवार का ताल्लुक भावनगर के पलिताना शहर से है। परिवार के 77 वर्षीय सदस्य चंद्रकांत सोमपुरा ने डिजाइन के काम को अंजाम दिया है।
परिवार के लिए सोमनाथ मंदिर उनके दिल के सबसे करीब है। सोमपुरा परिवार का मानना है कि उनके पूर्वजों को मंदिर निर्माण की कला स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने सिखाई थी। सोमपुरा खुद को ‘चंद्रमा के निवासी’ मानते हैं।
सोमपुरा कहते हैं कि वो वास्तुकला के किसी भी औपचारिक स्कूल में नहीं गए। उन्होंने इसे अपने दादा और पिता और शास्त्रों से सीखा है। हालांकि, उनके बेटे और अन्य जो मंदिर परियोजना में शामिल हुए वो प्रशिक्षित इंजीनियर या वास्तुकार हैं।
अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का डिजाइन जिसने तैयार किया है, उन्हें इस काम में महारत हासिल है। अपने इस काम के बूते उन्होंने न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया है। सोमपुरा परिवार के डिजाइन बनाने की एक और खास बात है। यह नागर शैली के मंदिरों की डिजाइन वास्तुकला के हिसाब से बनाते हैं। गुजरात के इस सोमपुरा परिवार ने अयोध्या से पहले भी कई बड़े मंदिरों के डिजाइन तैयार किए हैं। इनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर, अक्षरधाम और अंबाजी मंदिर शामिल है। इसके अलावा लंदन के स्वामीनारयाण मंदिर का डिजाइन भी इसी परिवार देन है। इनकी 15 पीढ़ियां अब तक देश विदेश में 200 से अधिक मंदिर की डिजाइन तैयार कर चुकी हैं।
दुर्घटना में परिवार ने खोया अपना सदस्य
चंद्रकांत के पिता प्रभाशंकर ने 1951 में गुजरात में सोमनाथ मंदिर का डिजाइन तैयार किया था। प्रभाशंकर को बाद में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। प्रभाशंकर ने 51 वर्षीय बेटे बलवंतराय को एक दुर्घटना में खो दिया, जब वह बद्रीनाथ मंदिर के नवीकरण परियोजना से लौट रहे थे। चंद्रकांत के बेटे आशीष को राम मंदिर परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मिली थी। आशीष की परियोजनाओं में मुंबई के एंटिला में अंबानी के घर में निजी मंदिर भी शामिल है।
34 साल पहले पेंसिल स्केच से शुरू किया था मंदिर का काम
सोमपुरा परिवार करीब 34 साल पहले ही राम जन्मभूमि से जुड़ गया था, जिसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है। दरअसल, उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला ने चंद्रकांत सोमपुरा से पूछा था कि क्या वह राम मंदिर परियोजना को अपनाएंगे और जब उन्होंने सहमति दी तो उन्हें विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल से मिलवाया। सोमपुरा ने तब कई बिड़ला मंदिरों पर काम किया था।
चंद्रकांत सोमपुरा ने अयोध्या में अशोक सिंघल से मुलाकात के बाद ही राम मंदिर पर काम शुरू किया। उस समय जब सोमपुरा पहली बार राम जन्मभूमि स्थान पर गर्भगृह के अंदर गए और उसे अपने कदमों से मापा, क्योंकि उन्हें कोई भी उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं थी। उस समय सोमपुरा पेंसिल ड्राइंग बनाते थे और ट्रेसिंग पेपर पर स्याही विशेषज्ञ बनाते थे। इस काम में चंद्रकांत के बेटे आशीष 1993 के आसपास अपने पिता के साथ जुड़ गए।
सोमपुरा ने मंदिर के लिए दो-तीन योजनाएं तैयार कीं, जिनमें से एक को मंजूरी मिली। उन्होंने एक लकड़ी का मॉडल बनाया गया और उसके बाद कुंभ मेले में मॉडल को जुटे साधुओं के सामने रखा गया, जिन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी।

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