जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली 24 मई से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाएं शुरू करेगा। ये कक्षाएं दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में 52 केंद्रों पर आयोजित की जाएंगी।
यह पहल पिछले 15 वर्षों से (2012 से) सफलता पूर्वक संचालित हो रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडी बच्चों को अपनी बोली-भाषा (गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी) पढ़ना-लिखना सिखाना है। इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को अपनी लोक संस्कृति और खान-पान से भी परिचित कराया जाता है। यह प्रयास उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखने में मदद करता है। साथ ही, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में दर्ज कराना भी एक प्रमुख लक्ष्य है। मंच के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती के मार्गदर्शन में तथा अन्य भाषा प्रेमियों के दिशा निर्देश से इन कक्षाओं का संचालन होता है।