जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नागरिक मंच की बैठक में प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड के मूल निवासियों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में नगर निगमों के विस्तार और मूल निवास से जुड़े मुद्दों पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
व्यापार मंडल सभागार में चंद्रप्रकाश नैथानी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम क्षेत्रों में भू-कानून लागू नहीं होता। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में नगर निगमों का विस्तार स्थानीय लोगों के हितों के विपरीत है। उनका कहना था कि प्रदेश की कम आबादी के बावजूद नगर निगमों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है, जिससे भविष्य में बाहरी लोगों को लाभ मिलने की आशंका है। बैठक में उत्तराखंड में 15 वर्ष से निवास कर रहे लोगों को विशेष कार्ड जारी करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में स्थायी निवास प्रमाण पत्र के स्थान पर मूल निवास प्रमाण पत्र की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे राज्य के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। बैठक में मोटर नगर परियोजना का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि परियोजना में अनियमितताओं के बावजूद नगर निगम की ओर से जांच रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके चलते फैसला ठेकेदार के पक्ष में गया। उनका कहना था कि नगर निगम को निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। वक्ताओं ने यह भी कहा कि हाल ही में नागरिक मंच का प्रतिनिधिमंडल विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर नगर आयुक्त से मिला था, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने नगर आयुक्त के रवैये पर नाराजगी जताते हुए इसे जनहित के अनुरूप नहीं बताया। बैठक में मुजीब नैथानी, अतुल भट्ट, देवव्रत काला, गोविंद डंडरियाल, केसीराम निराला, सत्यनारायण नौटियाल, शंकरदत्त गौड़, जेपी ध्यानी, विजय माहेश्वरी, आर.पी. पंत सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।