जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : शिव मंदिर हल्दूखाता में आयोजित सार्वजनिक शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण श्रवण किया। कथा के दौरान निकाली गई शिव-पार्वती की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथावाचक आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि हिमालय पुत्री पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ देवताओं और अपने गणों के साथ हिमालय के घर बारात लेकर पहुंचे थे और यह दिव्य विवाह जनकल्याण के उद्देश्य से संपन्न हुआ। उन्होंने आगे बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल शिव पुत्र ही कर सकता है। कार्यक्रम में शिव-पार्वती विवाह की मनमोहक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर विकास पंत, इंदू नौटियाल, नर्मदा देवी, दीपा देवी, संगीता रावत, कुसुमलता, बीना देवी, नंदा देवी, हेमलता, सुमन पुष्पा और सविता सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।