चमोली। नंदा देवी क्षेत्र में जैव विविधता का अध्ययन करने गया वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का दल लौट आया है। अलग-अलग विषयों पर किए गए अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि क्षेत्र में कुछ अच्छे तो कुछ चिंताजनक संकेत मिले हैं। खासकर वहां ग्लेशियरों के टूटने और उन पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखा है।
वैज्ञानिकों का दल सात जून को ज्योतिर्मठ से रवाना हुआ। दल ने लाता खर्क, धरासी, डिब्रूगेटा, डियोड़ी, भिटारतोली, रामणी, भुजगढ़, पातालखान होते हुए नंदा देवी के बेसकैंप सरसोपाताल तक अत्यंत दुर्गम स्थलों पर जैव विविधता की स्थिति का आकलन किया। दल अध्ययन कर ज्योतिर्मठ लौट आया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि नंदा देवी के अंतर्गत कई ग्लेशियर हैं, कई एवलांच ट्रैक हैं। ग्लेशियर टूटने से मोरेन फट रहे हैं। जियोलॉजी की टीम ने सैंपल लिए हैं, जिससे अध्ययन किया जाएगा कि यह कब से टूट रहे हैं।