-सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को चार सप्ताह में अपनी दलीलें पूरी करने को कहा; ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया निर्देश
नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल और घासÓ चुनाव चिह्न को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अंतिम निर्णय लेने के लिए समय-सीमा तय कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें और दस्तावेजी पक्ष पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर मामले पर फैसला करना होगा।
पीठ ने यह आदेश तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी है। आयोग ने पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घासÓ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतिम विवाद निपटने तक रोक लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अतिरिक्त दस्तावेज, शपथपत्र और जवाबी शपथपत्र दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने मामले से जुड़े चुनाव चिह्न विवादों में लगने वाले समय को लेकर अदालत के समक्ष एक समय-सीमा संबंधी विवरण भी रखा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अपनी दलीलों की सीमा के भीतर ही अपना पक्ष रखें। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी की ओर से यह मुद्दा उठाए जाने पर कि किसी पक्ष को दाखिल दलीलों से बाहर नहीं जाना चाहिए, अदालत ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो इस आपत्ति को चुनाव आयोग के समक्ष उठाया जा सकता है और आयोग उस पर विचार करेगा।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से मामले के निपटारे के लिए अधिक समय की जरूरत का पक्ष रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, आयोग की ओर से छह महीने का समय मांगा गया था, लेकिन पीठ ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना। न्यायालय ने कहा कि मामले के आयोग के समक्ष पहुंचने के बाद पहले ही समय बीत चुका है और अब इसे अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने हालांकि विवाद के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की। अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को दोनों पक्षों को सुनने और उनके दस्तावेजों तथा साक्ष्यों पर विचार करने के बाद करना होगा।
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और ‘फूल और घासÓ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर विवाद के अंतिम निपटारे तक रोक लगा दी थी। इसके साथ ही दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसÓ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ीÓ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेसÓ नाम और ‘लिफाफाÓ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू है।
ममता बनर्जी ने आयोग के इस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 24 सितंबर को पिछली सुनवाई में अदालत ने आयोग से यह बताने को कहा था कि दोनों गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न के विवाद का अंतिम निपटारा करने में उसे कितना समय लगेगा। इसके बाद सोमवार को अदालत ने मामले के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर दी।
अब दोनों गुटों को चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर यह तय करना होगा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल और घासÓ चुनाव चिह्न पर किस गुट का दावा स्वीकार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की अगली प्रमुख कार्रवाई चुनाव आयोग के समक्ष होगी, जहां दोनों पक्ष अपने दस्तावेज और साक्ष्य पेश करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह इस स्तर पर विवाद के अंतिम गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दे रही है।