उत्तराखंड में नर्सिंग संघों में खींचतान, कार्यकारिणी विस्तार और कार्यक्रमों पर विवाद, शासन ने बैठाई जांच

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देहरादून। उत्तराखंड में मरीजों की देखरेख करने वाले नर्सिंग अधिकारियों के संघों में खींचतान पैदा हो गई है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा की नर्सिंग एसो. में विवाद सुर्खियों में है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यकारिणी पर विवाद बन गया है। बैठक में दो पक्ष आमने सामने आ गए हैं, कार्यकारिणी विस्तार के लिए एक पक्ष छह तो दूसरे तीन माह पर विस्तार की बात कह रहे हैं। उधर, चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यक्रम को लेकर विवाद पनपा है और पंजीकरण शुल्क से पहले धन वसूली के भी आरोप लगे हैं। इस मामले में शासन ने बैठाई जांच, मंत्री ने भी रिपोर्ट तलब कर ली है और प्राचार्य की कमेटी जांच कर रही है। बैठक में नहीं बनी सहमति, दोनों पक्षों के अपने तर्क
स्वास्थ्य विभाग में विवाद: स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग अधिकारियों के संगठन उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाने पर रार हो गई है। एक पक्ष का कहना है कि दो तिहाई बहुमत से छह माह कार्यकाल बढ़ाया गया है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि तीन माह का कार्यकाल बढ़ाया गया है, उसके बाद चुनाव होंगे। उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की शनिवार को गांधी शताब्दी अस्पताल में प्रांतीय कार्यकारिणी एवं आम बैठक आयोजित की गई। जिसमें 13 जनपदों की कार्यकारिणी के पदाधिकारी भी शामिल रहे। इन दो बैठकों में दो वर्षों के कार्यों की समीक्षा की गई एवं आय व्यय का ब्योरा रखा गया। इस बैठक में कार्यकारिणी के चुनाव को लेकर चर्चा की गई। अध्यक्ष भारती जुयाल ने कहा कि जनपदों से आए पदाधिकारियों एवं आम सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से छह माह कार्यकाल बढ़ाया गया है। इस दौरान वरिष्ठ सलाहकार इंदु शर्मा, बबीता शर्मा, सुशीला पंवार, हिमांशु जोशी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष छवि घिल्डियाल, कुमाऊं मंडल अध्यक्ष जयंती रावत, जानकी, सीमा धीमान, रश्मि कठैत, राखी चौहान, कविता कुशवाह, इश्मिता बिष्ट, ऋतु सिंह आदि उपस्थित रहे। उधर, उधर, प्रदेश प्रभारी गिरीश उनियाल, प्रदेश उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र और कोषाध्यक्ष मस्तराम , पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष मीनाक्षी जखमोला, पूर्व महामंत्री कांति राणा, बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष हरिकृष्ण बिजल्वाण ने कहा कि चर्चा के दौरान तय किया गया कि तीन महीने बाद सितंबर में चुनाव होंगे। तीन महीने बाद खाता फ्रीज करा दिया जाएगा।
नर्सिंग दिवस कार्यक्रम बहिष्कार: दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नर्सिंग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का चिकित्सा शिक्षा नर्सेज संघ द्वारा विरोध करने, संघ द्वारा नर्सिंग अधिकारियों से पंजीकरण से पूर्व ही धन वसूली के आरोपों पर शासन ने जांच बैठा दी है। शासन एवं निदेशक डॉ. अजय आर्य के निर्देश पर प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने डॉ. वंदना बिष्ट, डॉ. शशि उप्रेती एवं डॉ. नितिन शर्मा की कमेटी बना जांच शुरू करा दी है। नर्सिंग दिवस पर कार्यक्रम आयोजन करने वालों में से चार वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों ने शासन में संघ पर कई गंभीर आरोप लगा शिकायत की है। आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री की उपस्थिति वाले सरकारी कार्यक्रम का संघ ने विरोध किया। संघ के गठन से पहले ही नर्सिंग अधिकारियों से रुपये वसूले गए। एक संघ कार्यकारिणी सदस्य का उत्पीड़न किया गया। संघ का पंजीकरण निरस्त करने, वसूली की जांच कराने और आरोपियों पर मुकदमे एवं जांच तक संघ के कार्यक्रमों पर रोक की मांग उठाई है। उधर, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल तक भी यह मामला पहुंचा है, उन्होंने सचिव स्वास्थ्य से इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है और विस्तृत जांच को कहा है।
अध्यक्ष का पक्ष : नर्सिंग दिवस कोई राजकीय कार्यक्रम नहीं होता है। संघ एवं संस्थान की ओर से कोई कार्यक्रम नहीं किया गया था, कई लोगों ने अलग-अलग कार्यक्रम किए। किसी को नहीं रोका गया है। मानसिक उत्पीड़न का आरोप बेबुनियाद है। संघ की सदस्यता का शुल्क लिया है, जिसकी रसीद दी है, इसमें कुछ गलत नहीं है। संघ के नियमों का पालन कर रहे हैं। कमेटी को जवाब दे रहे हैं। छवि धूमिल करने वालों पर विधिक कार्रवाई करेंगे।
सुपरवाइजर ड्यूटी पर सवाल : सुपरवाइजर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे हैं। दून अस्पताल में कई नर्सिंग अधिकारियों पर सुपरवाइजर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे हैं। जिससे वार्डों में अव्यवस्था पर एमएस ने सख्त चेतावनी दी है। कई इंचार्जों ने एएनएस पर अभद्रता एवं हटाने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे। एएनएस ने भी एमएस से शिकायत की है कि कई के द्वारा कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। एमएस डॉ. आरएस बिष्ट बोले, सभी को जिम्मेदारी से कार्य करने को निर्देशित किया है, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

 

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