उत्तराखण्ड को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की मांग की

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संयोजक ने केन्द्र सरकार से उत्तराखण्ड को बिना विधायिका के केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की मांग की है। उन्होंने मांग को लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने जल्द ही मांग पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
अभाविप के पूर्व जिला संयोजक शान्तनु थपलियाल ने कहा कि 9 नवम्बर 2020 को जन आंदोलन के पश्चात उत्तर प्रदेश से पहाड़ी राज्य के रूप में उत्तराखण्ड का गठन हुआ, लेकिन उत्तराखण्ड वासियों की जो अपेक्षाएं इस नवीन प्रदेश से थी वह साल दर साल ध्वस्त होती चली गई। 20 वर्षों में यह प्रदेश आठ मुख्यमंत्रियों का शासनकाल देख चुका है। पलायन की मार एवं रोजगार का अभाव इस प्रदेश को खाली कर चुका है। खराब राजनीतिक व्यवस्था के कारण प्रदेश में राष्ट्रव्यापी शासन भी लागू हो चुका है। विधायकों की खरीद फरोख्त का मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामने आया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ आपदा में जो घोटाला किया गया वह हिन्दुओं की आस्था के साथ अन्याय है। राज्य सरकार की नौकरियों के परीक्षा घोटाले एवं कोरोना काल में गरीब, असहाय जनता पर अत्याचार और क्वारंटाइन सेंटरों की दुर्दशा के मामले सामने आ रहे है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 20 वर्षों में उत्तराखण्ड में जो भी सरकार रही वह केवल इस प्रदेश के विनाश के लिए जिम्मेदार रही। उन्होंने कहा कि इस प्रदेश को बिना विधानसभा का केन्द्र शासित प्रदेश बनाया जाना चाहिए। तभी राज्य का विकास संभव है। ज्ञापन देने वालों में शान्तनु थपलियाल, पंकज नेगी, नवीन नेगी, मनोज शाह, अमित बडोला आदि शामिल थे।

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