करोड़ों खर्च के बाद बुद्धा पार्क (रजत जयंती पार्क) निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

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15 वर्षों में डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च, अब संचालन के लिए ईओआई आमंत्रित
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : शहर का प्रमुख बुद्धा पार्क (रजत जयंती पार्क) के संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर निगम निजी संस्था को सौंपनी की तैयारी में है। विडंबना यह है कि जिस पार्क के सौंदर्यीकरण पर पिछले 15 वर्षों में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, अब उसके संचालन के लिए निगम ने इच्छुक संस्थाओं, फर्मो, कम्पनियों व स्वयं सहायक समूहों से अभिरूचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए हैं। ऐसे में शहरवासियोें के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या निजी संस्था के हाथों में जाने के बाद पार्क की सुविधाएं बेहतर होंगी या फिर इसके उपयोग के लिए लोगों को शुल्क चुकाना पड़ेगा।
करीब सात दशक पहले बदरीनाथ मार्ग स्थित इस पार्क में प्रख्यात मूर्तिकार अवतार सिंह पंवार द्वारा भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद इसे बुद्धा पार्क के नाम से पहचान मिली। कभी घने छायादार पेड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध यह पार्क समय के साथ उपेक्षा का शिकार होता गया। पार्क को संवारने के लिए तत्कालीन नगर पालिका ने वर्ष 2011 में करीब 12 लाख और वर्ष 2016 में 25 लाख रुपये खर्च किए। इस दौरान पार्क की चारदीवारी बनाई गई, झूले, बेंच और अमेरिकन घास लगाई गई, लेकिन नियमित रख-रखाव की व्यवस्था नहीं होने से कुछ ही वर्षों में पार्क फिर बदहाल हो गया। उस समय पार्क में माली तक की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे सौंदर्यीकरण पर खर्च की गई राशि का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। नगर पालिका के नगर निगम बनने के बाद वर्ष 2023 में पार्क के पुनर्विकास के लिए लगभग 30 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इस राशि से नए झूले, बेंच और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। इसके बाद वर्ष 2025 में पार्क को आधुनिक स्वरूप देने के लिए करीब 98 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई। इस चरण में शौचालय, नए खेल उपकरण, सौंदर्यीकरण और अन्य निर्माण कार्य कराए गए, जिससे पार्क का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और यह एक बार फिर शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बन गया। अब नगर निगम पार्क के संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी किसी बाहरी संस्था को सौंपने की तैयारी में है। इसके लिए निगम ने इच्छुक संस्थानों से 17 जुलाई तक अभिरूचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नई व्यवस्था में पार्क का संचालन किस मॉडल पर होगा और क्या भविष्य में यहां प्रवेश शुल्क या अन्य उपयोग शुल्क लागू किए जाएंगे। यही कारण है कि शहर में इस निर्णय को लेकर बहस शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि जिस पार्क के विकास पर वर्षों से सरकारी धन खर्च किया गया है, उसका लाभ आम नागरिकों को बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के मिलता रहना चाहिए। अब सभी की निगाहें नगर निगम के अगले कदम पर टिकी हैं।

सांसद ने की थी घोषणा
कुछ माह पूर्व पार्क के सौदर्यीकरण के बाद इसे आमजन के लिए खोला गया था। इस मौके पर नगर निगम की ओर से एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। जिसमें गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने पार्क के सौदर्यीकरण के लिए अपनी ओर से भी धनराशि देने की बात कही थी। इसके लिए उन्होंने नगर निगम को एक प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे। यदि सांसद की ओर से भी धनराशि उपलब्ध होती है तो पार्क का बेहतर लाभ आमजन को मिलेगा। साथ ही नगर निगम स्वयं के माध्यम से भी इसकी देखरेख कर सकता है।

अधिकारी का बयान
मामले में सहायक नगर आयुक्त चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि पार्क को किसी भी तरह के ठेके पर नहीं दिया जा रहा। बल्कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए इच्छुक संस्थाओं, फर्मो, कम्पनियों व स्वयं सहायता समूहों से ईओआई आमंत्रित की गई है। पार्क का जिस तरह से लाभ वर्तमान में जनता को मिल रहा है इसी तरह भविष्य में भी मिलता रहेगा। उनसे किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

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