सहसपुर (देहरादून)। बटोली क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में लोग बेहद खराब और जोखिमभरे रास्ते से आवागमन करते दिखाई दे रहे हैं। रास्ते में मलबा, पत्थर और कीचड़ फैला हुआ है, जिसके बीच स्थानीय लोग एक-दूसरे का सहारा लेकर आगे बढ़ने को मजबूर नजर आ रहे हैं।
बरसात के मौसम में पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में रास्तों की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण बनी रहती है। ऐसे में यदि सुरक्षित आवागमन का वैकल्पिक इंतजाम न हो तो आम लोगों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए परेशानी और बढ़ जाती है।
बटोली के लोगों का सवाल-आखिर कब तक?
स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक उन्हें इस तरह जोखिम उठाकर आना-जाना पड़ेगा? वीडियो में जिस तरह लोग मलबे और खतरनाक ढलान के बीच से गुजरते नजर आ रहे हैं, उससे किसी भी समय हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामला सिर्फ रास्ते की परेशानी तक सीमित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति हो जाए या किसी परिवार को जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल
बटोली से सामने आई तस्वीरें यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि स्थानीय स्तर पर सड़क और आवागमन की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभागों एवं स्थानीय जन प्रतिनिधियों प्की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
यदि रास्ता लंबे समय से खराब है तो इसकी मरम्मत या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षित संपर्क मार्ग केवल सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है। बरसात के दौरान रास्तों की स्थिति और बिगड़ने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लें और सुरक्षित आवागमन के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक व्यवस्था करें, ताकि किसी बड़े हादसे का इंतजार न करना पड़े।