जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से वर्ष 1994 में चयनित सहायक अध्यापक (एलटी) शिक्षकों को उनके अधिकार के अनुरूप वरिष्ठता देने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। शासन ने मंडलीय अपर शिक्षा निदेशक, गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल को वर्ष 1992 से 1996 तक के एलटी शिक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। मामले में कोटद्वार के शिक्षक रूप चंद्र लखेड़ा की ओर से न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
लंबे समय से लंबित इस मामले में न्यायालय के निर्देशों के बाद विभाग ने वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया तेज कर दी है। शिक्षक रूप चंद्र लखेड़ा ने बताया कि विवाद की जड़ वर्ष 2005 में सीटी संवर्ग के शिक्षकों का एलटी संवर्ग में समायोजन था। उस समय नियमों के विपरीत मात्र पांच वर्ष की सेवा पूरी होने पर ही सीटी शिक्षकों को एलटी संवर्ग में समायोजित कर वरिष्ठता का लाभ दे दिया गया, जबकि नियमानुसार इसके लिए 10 वर्ष की सेवा आवश्यक थी। इससे आयोग से चयनित एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हुई और वे वर्षों तक पदोन्नति से वंचित रहे। इस प्रकरण से जुड़े तदर्थ शिक्षकों के मामले में 7 जुलाई 2026 को उच्च न्यायालय ने अंतिम निर्णय सुनाया था। शिक्षक संगठनों और प्रभावित शिक्षकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।