उत्तरकाशी। मोरी विकासखंड के कासला गांव में जहरीली घास चरने से करीब 100 भेड़-बकरियां बीमार हो गई। सूचना मिलते ही पशुपालन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पशु चिकित्सालय मोरी-नैटवाड़ से विशेष जांच एवं उपचार टीम को गांव रवाना किया।विभागीय टीम ने बीते बुधवार सुबह गांव पहुंचकर बीमार पशुओं का परीक्षण शुरू किया और संक्रमण एवं संभावित विषाक्त घास के प्रभाव की जांच की। साथ ही प्रभावित पशुओं को आवश्यक दवाएं देकर उपचार किया गया और पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई।पशु चिकित्साधिकारी मोरी डॉ. रजनीश स्वामी ने बताया कि कासला के ग्राम प्रधान ने बुधवार देर शाम भेड़-बकरियों के बीमार होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही विभागीय टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। टीम ने गांव पहुंचकर बीमार पशुओं का परीक्षण कर उपचार शुरू किया जो अगले दिन भी जारी रखा गया।
पशुधन प्रसार अधिकारी दीपेंद्र जयाड़ा ने बताया कि जांच के दौरान कुछ बकरियों में पाचन संबंधी समस्याएं पाई गईं। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार देखा गया और अधिकांश पशु सामान्य अवस्था में लौट आए हैं। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय शिविर के दौरान करीब 15 बकरियों की जांच की गई व कृमिनाशक, एंटीबायोटिक और अन्य आवश्यक पशु औषधियों का वितरण किया गया।
विभागीय टीम ने पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य पर नियमित निगरानी रखने, जहरीली घास से बचाव करने व किसी भी प्रकार के बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशुपालन विभाग मोरी या नैटवाड़ को सूचना देने की अपील की है। पशुपालन विभाग की त्वरित कार्रवाई से पशुपालकों ने राहत महसूस की है और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विभाग का आभार व्यक्त किया है।