हल्द्वानी। विश्व प्रसिद्ध कैंचीधाम मेले के चलते 14 और 15 जून को कुमाऊं और गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित रहेगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केमू और रोडवेज की करीब 350 से अधिक बसों को मेला ड्यूटी में लगाया है। इसके चलते कई नियमित पर्वतीय रूटों पर बस सेवाओं में कटौती कर दी गई है, जिससे स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पर्यटन सीजन और वीकेंड के कारण इन दिनों नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, कर्णप्रयाग और अन्य पर्वतीय जिलों में पर्यटकों की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे समय में बसों की कमी से यात्रा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
कुमाऊं की लाइफलाइन मानी जाने वाली कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन (केमू) की लगभग 400 बसें पूरे कुमाऊं और गढ़वाल के प्रमुख मार्गों पर संचालित होती हैं। परिवहन विभाग ने इनमें से करीब 250 बसों को कैंचीधाम मेले के लिए शटल सेवा में लगाया है। इन बसों को 14 जून से निर्धारित शटल प्वाइंट पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इसके कारण रविवार सुबह से ही पर्वतीय रूटों पर बसों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
वहीं, हल्द्वानी और काठगोदाम रोडवेज डिपो से भी करीब 100 बसों की मांग मेले के लिए की गई है। रोडवेज प्रबंधन ने मेला ड्यूटी को देखते हुए 14 और 15 जून को संबंधित चालकों की छुट्टियां भी निरस्त कर दी हैं। परिवहन सेवाओं में कटौती का सबसे अधिक असर दूरस्थ क्षेत्रों के यात्रियों पर पड़ सकता है। विशेषकर पिथौरागढ़ जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे यात्रा समय और खर्च दोनों बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने यात्रियों से आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। केमू के ईडी हिम्मत सिंह नयाल ने बताया कि कैंची मेले में 250 बसें मांगी गई हैं। दो दिनों तक अधिकांश पर्वतीय रूटों की सेवाएं बाधित रहेंगी। 16 जून से ही स्थिति सामान्य होने का अनुमान है।
उधर, रोडवेज हल्द्वानी डिपो के एआरएम संजय पांडे ने बताया कि हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर, रानीखेत, अल्मोड़ा समेत कई डिपो से बसों को कैंची मेले में लगाया गया है।