अनिल अंबानी की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट भेजने की केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी अनुमति

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-काले धन से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिका का मामला; शीर्ष अदालत ने पूछा- एक हाईकोर्ट को दूसरे पर तरजीह क्यों दें?
नई दिल्ली,केंद्र सरकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर उस याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की है, जिसमें काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) एवं कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। केंद्र का कहना है कि इसी कानून से जुड़े कई मामले अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित हैं और इनके कारण राजस्व से संबंधित कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि इन मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने का राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है।
केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने काला धन कानून के तहत अनिल अंबानी के खिलाफ जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। केंद्र ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं अन्य हाईकोर्ट में भी लंबित हैं।
वकील ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट में इस कानून से संबंधित एक दर्जन से अधिक मामले लंबित हैं और वे सुनवाई के लिए तैयार हैं। इसी आधार पर केंद्र ने अनिल अंबानी की याचिका को भी दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का अनुरोध किया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र से सवाल किया कि मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में ही स्थानांतरित करने की मांग क्यों की जा रही है। पीठ ने पूछा, हमें एक हाईकोर्ट को दूसरे पर क्यों तरजीह देनी चाहिए?
केंद्र की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका लंबे समय से आगे नहीं बढ़ी है, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट में इसी तरह के मामले सुनवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी संबंधित मामलों पर एक ही हाईकोर्ट में सुनवाई होती है तो कानून से जुड़े विवाद का जल्द समाधान हो सकता है।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को पूर्व के एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने माल एवं सेवा कर कानून की धारा 171 को चुनौती देने वाली विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित किया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर फैसला सुनाया।
केंद्र के वकील ने आग्रह किया कि काला धन कानून से जुड़े मामलों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाए, ताकि एक समान मुद्दे पर अलग-अलग हाईकोर्ट के फैसलों की स्थिति से बचा जा सके।
पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला इस मुद्दे को सुलझाने में मदद कर सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मामले को स्थानांतरित करने के बजाय संबंधित हाईकोर्ट से जल्द फैसला कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
पीठ ने संकेत दिया कि केंद्र बॉम्बे हाईकोर्ट से भी मामले पर जल्द फैसला करने का अनुरोध कर सकता है। अदालत ने कहा कि यदि बॉम्बे हाईकोर्ट मामले पर फैसला कर देता है तो विवाद के समाधान का रास्ता खुल सकता है।
केंद्र की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट की ओर से कार्रवाई पर लगाई गई रोक जितने लंबे समय तक जारी रहेगी, विदेशों में जमा अघोषित धन को वापस लाने के उद्देश्य पर उतना ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। केंद्र ने कहा कि अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित मामलों के कारण काला धन वापस लाने से संबंधित कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि संबंधित हाईकोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट से मामले पर जल्द फैसला करने का अनुरोध करने पर विचार कर सकती है।
केंद्र ने यह भी बताया कि देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और काला धन कानून के तहत की जाने वाली कार्रवाई इन मुकदमों के कारण अटकी हुई है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित काला धन कानून से जुड़े मामलों की सूची उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद पीठ ने सुनवाई आगे के लिए टाल दी।

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