कोलकाता , पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (ञ्जरूष्ट) से बगावत कर अलग गुट बनाने वाले लोकसभा सांसद और पूर्व धाकड़ क्रिकेटर यूसुफ पठान की एक अचानक हुई ‘सीक्रेट मीटिंगÓ ने सियासी गलियारों में भारी खलबली मचा दी है। पठान ने गुरुवार को नबान्न पहुंचकर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से खास मुलाकात की। इस गुपचुप बैठक का एजेंडा क्या था, इसे लेकर दोनों ही पक्षों ने पूरी तरह से चुप्पी साधी हुई है। इस मुलाकात ने अटकलों के बाजार को इसलिए भी पूरी तरह से गर्म कर दिया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (क्चछ्वक्क) ने हाल ही में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है।
टीएमसी में मची है भारी भगदड़, 20 सांसदों और 60 विधायकों की बगावत
यह कोई छिपी बात नहीं है कि यूसुफ पठान उन 20 बागी सांसदों की सूची में प्रमुखता से शामिल हैं, जिन्होंने बीते जून महीने में टीएमसी से नाता तोड़कर ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडियाÓ (हृष्टक्कढ्ढ) में विलय का ऐलान कर दिया था। इस बागी धड़े में सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और रचना बनर्जी जैसे कई बड़े और दिग्गज चेहरे शामिल हैं। केवल सांसद ही नहीं, बल्कि टीएमसी के 60 से ज्यादा विधायक भी खुलेआम बगावती सुर अपना चुके हैं। यूसुफ पठान के अलावा बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय ने भी हाल ही में मुख्यमंत्री से अलग से मुलाकात की है, जिसने इस पूरे सियासी ड्रामे में नया सस्पेंस जोड़ दिया है।
सुपरस्टार प्रसनजीत चटर्जी की मुलाकात से भी बढ़ा सस्पेंस
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दरबार में सिर्फ बागी नेता ही नहीं पहुंच रहे हैं। गुरुवार को ही बंगाली सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार प्रसनजीत चटर्जी ने भी सीएम से करीब दो घंटे तक लंबी और बंद कमरे में मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रसनजीत के घर पहुंचे थे। हालांकि, बाहर निकलने के बाद प्रसनजीत ने इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक करार दिया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि दोनों ने सिर्फ साथ में कॉफी पी है और अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। इसके बावजूद, राजनीतिक पंडित इसे एक बड़े सियासी खेल के अहम हिस्से के रूप में देख रहे हैं।
स्पीकर को पत्र सौंपकर अलग बैठने की हो चुकी है मांग
आपको बता दें कि पिछले महीने ही इस बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र सौंपकर संसद में अलग बैठने की जगह मांगी थी। तब सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट रूप से दावा किया था कि उनके पास 20 सांसदों का मजबूत समर्थन है, जो पार्टी के कुल सदस्यों के दो-तिहाई आंकड़े से भी अधिक है। टीएमसी से बगावत करने वाले इन प्रमुख चेहरों में प्रसून बंद्योपाध्याय, दीपक अधिकारी, खलीलुर रहमान, बापी हलदार, डॉ शर्मिला सरकार और जून मलिया जैसे कई कद्दावर नेता शामिल हैं, जिन्होंने सीधे तौर पर अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ मजबूत मोर्चा खोल रखा है।