डांडा नागराजा में अष्टादश महापुराण कथा पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध सिद्धपीठ डांडा नागराजा मंदिर में आयोजित अष्टादश महापुराण श्रीमद्भागवत कथा एवं महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गया है। इस मौके पर भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने सात दिवसीय कथा का आनंद लिया। इन सात दिनों में श्री डांडा नागराजा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली है।
सात जून से शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिवस पर कथा वाचक मुनि अभय चैतन्यानंद महाराज ने नैतिकता, सदाचार और सत्याचरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों को अपनाकर व्यक्ति श्रेष्ठ जीवन और आदर्श समाज का निर्माण कर सकता है। श्री डांडा नागराजा धर्मक्षेत्र विकास समिति द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण, पूजा-अर्चना और यज्ञ में सहभागिता कर रहे हैं। समिति के संस्थापक सुभाष चन्द्र देशवाल ने बताया कि डांडा नागराजा उत्तराखंड के प्रमुख सिद्धपीठों में शामिल है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। आयोजन के दौरान कथा प्रवचन, वैदिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और यज्ञ के माध्यम से धर्म एवं संस्कृति का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु भगवान नागराजा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। कथा के अंतिम दिन सोमवार को महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ज्येष्ठ प्रमुख कोट उपेंद्र भट्ट, मंदिर समिति अध्यक्ष कमलेश चमोली, सचिव राजेंद्र प्रसाद बिजलवां, संयोजक बीरेंद्र प्रसाद भट्ट, पूर्व अध्यक्ष शशिकांत चमोली मुख्य पुजारी किशोर देशवाल, विनोद देशवाल आयोजित कथा के मीडिया संयोजक आनंद नागोई सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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