भारत सरकार ने किया टिकटक बैन

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नई दिल्ली,एजेंसी। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय सेनाओं के साथ हिंसक झड़प के बाद चीन को सैन्य मोर्चे पर करारा जवाब दिया गया। वहीं आर्थिक और अन्य मोर्चे पर भी उसके खिलाफ मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 59 चाइनीज मोबाइल एप को प्रतिबंधित कर दिया है। इसमें टिकटक, यूसी ब्राउसर, शेयर इट और अन्य चाइनीज एप शामिल हैं।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार से कहा था कि या तो चीन से जुड़े 52 मोबाइल एप्लिकेशन को ब्लक कर दिया जाए या लोगों को इनका इस्तेमाल ना करने की सलाह दी जाए, क्योंकि इनका इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं है। ये ऐप बड़े पैमाने पर डेटा को भारत से बाहर भेज रहे हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने हिंदुस्तान टाइम्स को यह जानकारी दी थी।
सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को जो लिस्ट भेजी थी उसमें वीडियो कन्फ्रेंसिंग एप जूम, टिकटक, यूसी ब्राउजर, एक्सएंडर, शेयर इट और क्लीन मास्टर जैसे एप शामिल थीं।
इस साल अप्रैल महीने में गृह मंत्रालय ने जूम के इस्तेमाल को लेकर एक अडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने यह अडवाइजरी नेशनल साइबर सिक्यरिटी एजेंसी कंप्यूटर इमर्जेंसी रेस्पन्स टीम इंडिया (ब्म्त्ज्-पद) के प्रस्ताव पर जारी की थी। भारत पहला देश नहीं है जिसने सरकार में जूम एप के इस्तेमाल पर रोक लगाई।इससे पहले ताइवान ने भी सरकारी एजेंसियों को जूम एप के इस्तेमाल से रोक दिया। जर्मनी और अमेरिका भी ऐसा ही कर चुके हैं। कंपनी ने गृह मंत्रालय की एडवाइजरी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह यूजर्स की सिक्यरिटी को लेकर गंभीर है।
सिक्यरिटी से समझौता करने वाले मोबाइल एप्स पर कार्रवाई की मांग उठती रही है। वीडियो शेयरिंग एप के स्वामित्व वाली चाइनीज इंटरनेट कंपनी बाइट डांस जैसी कंपनियां इससे इनकार करती रही थी। लेकिन अधिकारियों का कहना था कि चाइनीज डिवेलपर्स की ओर से तैयार या चाइनीज लिंक्स वाले एप भले ही वह एंड्रयड के लिए हों या आईओस के लिए, इनका इस्तेमाल स्पाइवेयर या अन्य नुकसान पहुंचाने वाले वेयर के रूप में हो सकता है।
ऐसी खबरें थी कि सिक्यरिटी एजेंसियों ने सुरक्षाकर्मियों को इन चीनी एप्स का इस्तेमाल ना करने की सलाह दी थी क्योंकि इससे उनकी डेटा सिक्यरिटी को खतरा

भारत-चीन के बीच आज होगी कोर कमांडर स्तर की तीसरी बैठक

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी अतिक्रमण को लेकर सीमा पर जारी भारी तनाव को घटाने का रास्ता निकालने के लिए भारत और चीन के बीच मंगलवार को कोर कमांडर स्तर की बातचीत होगी। दोनों देशों की सेनाओं की सीमा पर मोर्चेबंदी के बीच बातचीत के जरिये गतिरोध का हल निकालने के लिहाज से सैन्य स्तर की इस वार्ता को अहम माना जा रहा है। वैसे गलवन घाटी के खूनी संघर्ष से बढ़े तनाव के बाद भारत ने अपना रुख कड़ा करते हुए चीन को पहले ही साफ दिया है कि तनातनी घटाने के लिए एलएसी के दोनों तरफ मई से पूर्व की यथास्थिति बहाली अनिवार्य जरूरत है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मंगलवार को कोर कमांडर स्तर की तीसरे दौर की वार्ता में 22 जून को कोर कमांडर स्तर की हुई वार्ता के बिन्दुओं की समीक्षा की जाएगी। कोर कमांडरों की यह वार्ता भारत के चुशूल सेक्टर में सुबह साढे दस बजे शुरू होगी। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व सेना के 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे तो चीनी सेना की ओर से तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रक्ट कमान के कमांडर इसमें शरीक होंगे। कमांडर स्तर की पहली दो बैठकें 6 और 22 जून को चुशूल के निकट चीन के इलाके मोल्डो में हुई थी।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में एक दूसरे को जानकारी देंगे। इसके बाद एलएसी के उन जगहों पर बने तनाव को लेकर चर्चा होगी जहां अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद और गतिरोध है। 6 जून को कोर कमांडर स्तर की पहली वार्ता में बनी सहमति के मुद्दों पर कार्यान्वयन को मौजूदा गतिरोध के हल के लिए भारत जरूरी मान रहा है। चीन के 6 जून के समझौते से पलटने के कारण ही गलवन घाटी में खूनी संघर्ष हुआ था। जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए तो कई चीनी सैनिक भी मारे गए।

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