किसानों के समर्थन में वाम संगठनों ने दिखाये काले झंडे

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अल्मोड़ा। नये कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहे किसानों के आंदोलन को 26 मई को छह माह पूरे हो गये हैं। इस दिन को ट्रेड यूनियनों और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने काला दिवस के रूप में मनाया। अल्मोड़ा में भी संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस के समर्थन में वामपंथी पार्टियों से जुड़े लोगों ने वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किए। पोस्टर और काले झड़े फहराकर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही मोदी सरकार से किसान विरोधी काले कानूनों को वापस लेने की मांग की। बुधवार को वक्ताओं ने कहा आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने कहा आज ही के दिन 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार का गठन हुआ था। साथ ही सरकार की ओर से लागू किये गये तीन किसान विरोधी कानूनों को भी छह माह पूरे हो गये हैं। कहा तब से लेकर अब तक जिस मजबूती के साथ किसान इस आंदोलन को चला रहे हैं, वह अपने आप में एक अलग इतिहास है। उन्होंने कहा कोरोना महामारी के बीच भी किसानों की जायज मांगों के बारे में केंद्र सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है। जिससे लोगों में आक्रोश है। कहा मोदी सरकार जितने बड़े-बड़े वायदे करके सत्ता में आई थी, वह उन्हें पूरा करने में नाकाम रही है। मोदी सरकार किसानों, मजदूरों ,नौजवानों, छात्र, महिला, कर्मचारी, छोटे व्यवसाइयों का विरोधी और कॉर्पोरेट परस्त रहा है। जिसने जनता को बेरोजगारी और भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
ये है मांगें:- काले दिवस पर तीनों कृषि कानून वापस लेने, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, निजीकरण खत्म किये जाने, सभी नागरिकों को मुफ्त और सार्वभौमिक टीकाकरण प्रदान करने, पीएम केअर फंड का उपयोग ऑक्सीजन, अच्छे वेंटीलेटर, दवाएं तथा जन स्वास्थ्य सुविधा का विस्तार किये जाने, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने, जरूरतमंदों को छह माह तक 10 किलो राशन मुहैया कराए जाने, निजी क्षेत्र में रोजगार हानि पर मुआवजा दिए जाने, छात्रों की फीस माफ करने, गरीब व कमजोर तबकों के छात्रों को सभी शैक्षणिक सुविधा मुफ्त दिए जाने, आयकर की श्रेणी से बाहर परिवारों के खातों में 7500 रुपये देने और आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा करने आदि की मांग।
इन्होंने दिया समर्थन:- जनवादी महिला समिति की मुन्नी प्रसाद, राधा नेगी, पूनम तिवारी, भावना तिवारी, भगवती तिवारी, गीता पांडे, नीमा देवी, सुनीता पांडे, ममता आर्या, वसुधा पंत, भावना जोशी, चन्दा राणा, आशा, प्रेमा पांडे, जनवादी नौजवान सभा के यूसुफ तिवारी, मुमताज अख्तर, योगेश टम्टा, किसान सभा के अरुण जोशी, किसान भंडारी, नंदबल्लभ जोशी, डूंगर सिंह भाकुनी, शेर सिंह भाकुनी, रघुवर दत्त जोशी, ईश्वर जोशी, दीपक जोशी, दिनेश पांडे, आरसी उपाध्याय, शिवराज सिंह, शंकर लाल टम्टा, मुकेश जोशी, सीटू के आरपी जोशी, महेश आर्या, दया कृष्ण,गोविंद सिंह, किशन सिंह, बलवंत सिंह, सुशील जोशी, आरपी जोशी के अलावा पीटीसी, भोजनमाता, आशाएं और ग्राम प्रहरी।

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