ऋषिकेश। योगनगरी में रविवार को अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम की जयंती भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाई गई। विभिन्न स्थानों पर विशेष पूजा-अर्चना की गई और भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके शौर्य और ज्ञान को याद किया गया। परशुराम महासभा ने परशुराम चौक पर परशुराम जयंती धूमधाम से मनाई गई। सुबह भगवान परशुराम की आरती, हवन पूजन किया गया। परशुराम चौक पर कार्यक्रम का शुभारंभ दंडी स्वामी विज्ञानानंद तीर्थ, केशव स्वरूप महाराज, परशुराम सभा के अध्यक्ष संदीप शास्त्री, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, राज्य मौन पालन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने संयुक्त रूप से किया गया। स्वामी विज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए इस प्रकार के धार्मिक आयोजन आवश्यक है। हमें अगर सनातन धर्म की मजबूत स्थापना करनी है तो परशुराम जैसे महापुरुषों की जयंती को मनाना होगा। स्वामी केशव स्वरूप महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम के चरित्र से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने माता-पिता के वचनों के पालन के लिए अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़े तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। अधर्म के खिलाफ हमेशा आवाज उठाने का कार्य करना चाहिए। परशुराम सभा के अध्यक्ष संदीप शास्त्री ने कहा कि भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन मनाया जाता है। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि कलयुग में भगवान परशुराम अपने शस्त्र द्वारा विभिन्न संदेश देते हैं। भगवान परशुराम के विचार व आदर्शो पर चलकर ही एक कुशल नागरिक बना जा सकता है। मेयर शंभू पासवान ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए। इससे हमें महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा मिलती रहती है। उत्तराखंड मौन पालन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने कहा भगवान के अन्य अवतार तो धर्म स्थापना करके विष्णु लोक चले गए पर परशुराम जीव अवतार के रूप में पृथ्वी लोक में ही रह गए और चिरंजीवी कहलाए।