देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और विधायकों के प्रदर्शन का आंतरिक आकलन तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे में कई मौजूदा विधायकों के प्रति जनता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 32 भाजपा विधायकों के खिलाफ उनके क्षेत्रों में असंतोष दर्ज किया गया है, जिससे आगामी चुनाव में उनके टिकट पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं, स्थानीय पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से फीडबैक लिया। इस सर्वे का उद्देश्य सरकार के बजाय विधायकों के व्यक्तिगत प्रदर्शन, जनसंपर्क, उपलब्धता और क्षेत्रीय छवि का मूल्यांकन करना था। रिपोर्ट के अनुसार कई स्थानों पर विकास कार्यों के बावजूद जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी देखने को मिली।
धामी के लिए सुरक्षित सीट पर भी मंथन
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भविष्य में एक सुरक्षित विधानसभा सीट को लेकर भी संगठन स्तर पर विचार किया जा रहा है, ताकि चुनाव के दौरान वे पूरे प्रदेश में प्रचार अभियान पर अधिक ध्यान दे सकें। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
संगठन की रणनीति
सूत्रों के अनुसार भाजपा इस बार उम्मीदवार चयन में केवल जीत की संभावना ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोकप्रियता, संगठन से तालमेल और जनता के बीच सक्रियता को भी प्रमुख आधार बना रही है। पार्टी उन सीटों पर नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर सकती है, जहां लंबे समय से जनप्रतिनिधियों के खिलाफ असंतोष की शिकायतें मिल रही हैं।
विपक्ष की स्थिति भी होगी अहम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट वितरण में अंतिम निर्णय स्थानीय समीकरण, विपक्ष की ताकत, जातीय एवं सामाजिक संतुलन और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
ऐसे में आंतरिक सर्वे केवल एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है, अंतिम फैसला नहीं।