पुरोला। रवांई घाटी के सेब उत्पादक इस बार बेहद चिंतित हैं। क्षेत्र में असमय बारिश, पाला और बार-बार हुई ओलावृष्टि ने सेब की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों का कहना है कि इस बार बागों में सामान्य उत्पादन का मात्र 10 प्रतिशत सेब ही बच पाया है जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और बैंक ऋण चुकाने की समस्या खड़ी हो गई है।
सेब उत्पादकों का कहना है कि फूल आने के समय हुई बारिश और पाले ने अधिकांश फ्लॉवरिंग को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद जो थोड़ी-बहुत फसल बची थी वह लगातार हुई ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई। इससे उत्पादन काफी गिर गया है। आराकोट के सेब उत्पादक किसान मनमोहन चौहान ने बताया कि उनके बगीचे से हर वर्ष करीब दो हजार सेब के बॉक्स तैयार होते थे लेकिन इस बार 60 से 70 बॉक्स निकलना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
वहीं पुरोला क्षेत्र के किसान बिजेन्द्र रावत ने कहा कि उनके बगीचे से आमतौर पर लगभग एक हजार बॉक्स उत्पादन होता था जबकि इस बार पूरे बगीचे में 20 बॉक्स सेब निकलना भी कठिन लग रहा है। प्रमोद रावत, हरीश चौहान, प्रमोद, कपिल, राजेश, मनमोहन, रामप्रसाद आदि किसानों का कहना है कि उत्पादन में भारी गिरावट के कारण बागों में किए गए दवाइयों, खाद और अन्य प्रबंधन खर्चों की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।