श्रीनगर गढ़वाल : श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय का निक्कू वार्ड समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों के लिए जीवन की उम्मीद बना है। हाल ही में यहां एक नवजात का 25 सप्ताह में जन्म हुआ और वजन सिर्फ 700 ग्राम था। निक्कू वार्ड में उसका उपचार चला और स्वस्थ होने पर उसे घर भेज दिया गया। स्टाफ ने उसे ‘निक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब दिया। इससे पहले भी यहां पिछले एक वर्ष में 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्में कई कम वजन वाले नवजातों का सफल उपचार किया गया है।

रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के बच्चे का जन्म महज 25 सप्ताह में हुआ। जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 700 ग्राम था और हालत गंभीर थी। निक्कू वार्ड में करीब दो माह तक उपचार और निगरानी के बाद बच्चे का वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और वह मां का दूध पीने लगा। स्वस्थ होने पर उसे घर भेज दिया गया। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने बच्चे को ‘निक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब देकर विदाई दी। इसी तरह 27 सप्ताह में जन्में नवजात समेत रुद्रप्रयाग से रेफर होकर आए कई प्री-मैच्योर बच्चों का उपचार यहां किया गया। 28 सप्ताह में जन्मे जुड़वां बच्चों में एक की रास्ते में मौत हो गई, जबकि दूसरे को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. सीएम शर्मा ने बताया कि 25 से 30 सप्ताह में जन्मे बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे नवजातों को वेंटिलेटर सपोर्ट, विशेष दवाओं, पोषण और लगातार निगरानी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में ऐसे उपचार पर 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं, जबकि बेस अस्पताल में पात्र मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपचार मिल रहा है। प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने निक्कू वार्ड की टीम को बधाई दी। (एजेंसी)