नईदिल्ली,मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवादों के बीच चुनाव आयोग ने अब नए मतदाता बनने के लिए जरूरी जानकारी में भी बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में अब माता-पिता के एसआईआर से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। हालांकि, फिलहाल ये बदलाव केवल ऑनलाइन फॉर्म में हुआ है, जबकि ऑफलाइन फॉर्म में पहले की ही तरह है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म 6 में एक डिक्लेरेशन है, जिसमें आवेदक से एसआईआर की जानकारी मांगी गई है। यहां 3 विकल्प हैं। पहला- मेरा नाम पिछले एसआईआर इलेक्टोरल रोल में है। दूसरा- मेरे माता-पिता (दादा, दादी) का नाम पिछले एसआईआर में है। तीसरा- न तो मेरा और न ही मेरे माता-पिता का नाम पिछले एसआईआर में है। पहले 2 विकल्प चुनने पर आवेदक से विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और अपने या अपने माता-पिता के नाम का सीरियल नंबर देना होता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 का कानूनी आधार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत बनाए गए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 से प्राप्त होता है। अधिनियम की धारा 28 में प्रावधान है कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी कर नियम बना सकती है। रिपोर्ट में आयोग के पूर्व अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, फॉर्म में मामूली बदलाव के लिए भी नियमों में संशोधन और कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना की जरूरत होती है।
दरअसल, ये बदलाव ऐसे वक्त सामने आया है, जब एसआईआर को लेकर पूरे देश में विवाद का माहौल है। 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में हुए एसआईआर के बाद 5.58 करोड़ से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसे में इन लोगों के बच्चों पर इस कदम का असर पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में तो विचाराधीन 27 लाख से ज्यादा मतदाता विधानसभा चुनावों में मतदान नहीं कर पाए, क्योंकि उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म में ये बदलाव उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिखाई दे रहा है, जहां 2025-26 के दौरान एसआईआर हो चुका है। हालांकि बिहार और असम के फॉर्म में ऐसा नहीं है। आयोग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर कोई आवेदक तीसरा विकल्प चुनता है, यानी उसके या उसके माता-पिता का नाम पिछले एसआईआर में नहीं था, तो उसके आवेदन की जांच या प्रक्रिया पर क्या असर होगा।