जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : संत निरंकारी मिशन की ओर से कोटद्वार स्थित संत निरंकारी भवन में आयोजित बाल संत समागम में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक संस्कारों की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों में मानवता, सेवा, अनुशासन और करुणा जैसे मूल्यों का विकास भी उतना ही आवश्यक है। अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से सत्संग और आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया गया।
समागम को संबोधित करते हुए महात्मा धर्मेंद्र पायल ने कहा कि आज के समय में केवल आधुनिक शिक्षा और भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को आत्मिक ज्ञान और मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी जरूरी है, ताकि वे जीवन में सफल होने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी बन सकें। उन्होंने कहा कि बाल संत समागम का उद्देश्य बच्चों के भीतर प्रेम, सेवा, विनम्रता, अनुशासन, करूणा और मानवता जैसे गुणों का विकास करना है। यदि जीवन में प्रेम, संवेदनशीलता और इंसानियत का अभाव हो तो बड़ी से बड़ी उपलब्धियां भी अपना महत्व खो देती हैं। महात्मा धर्मेंद्र पायल ने कहा कि विज्ञान मनुष्य को चांद तक पहुंचा सकता है, लेकिन मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने का कार्य केवल मानवता और ब्रह्मज्ञान ही कर सकते हैं। ऐसे आयोजनों में बच्चों को सत्संग के माध्यम से जीवनोपयोगी संस्कार प्राप्त होते हैं, जो उन्हें सेवा, सद्भाव, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति प्रेरित करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि जिस प्रकार वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर सजग रहते हैं, उसी प्रकार उनके नैतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान दें तथा उन्हें नियमित रूप से बाल समागम और सत्संग में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।