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यूपी में उत्तराखंड के वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं, नजीबाबाद से वापस मंगाई बस

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सीमा क्षेत्र में दूसरे राज्यों की रोडवेज बसों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों पर उत्तर प्रदेश में रोक लगने से अब कोटद्वार डिपो की बसें दिल्ली, जयपुर, राजस्थान, चंडीगढ़, अमृतसर, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल नहीं जा सकेगी। 
वर्तमान में कोटद्वार डिपो के पास 52 बसें हैं, 17 बसें अनुबंधित हैं। कुल 69 बसें उत्तराखंड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो के पास हैं। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री अपने गंतव्य के लिए यात्रा करते है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के कारण परिवहन निगम की बसों का संचालन बंद हो गया था। हालांकि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से प्रवासियों को लाने के लिए परिवहन निगम की बसों को लगाया गया था। स्थिति सामान्य होने के बाद परिवहन निगम की बसों का संचालन शुरू किया गया। धीरे-धीरे डिपो की कमाई होने लगी थी और प्रतिदिन की आय 7 से 8 लाख तक पहुंच गई थी, लेकिन अप्रैल माह में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से फैलना शुरू हुआ। जिस कारण लोग निगम की बसों में यात्रा करने से कतराने लगे और निजी वाहनों को प्राथमिकता देने लगे। जिससे निगम की आय घटने लगी। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए यूपी में दूसरे राज्यों की रोडवेज बसों पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में कोटद्वार रोडवेज डिपो की अधिकांश बसें अब खड़ी ही रहेगी। क्योंकि उत्तराखण्ड की अधिकांश सीमा उत्तर प्रदेश से लगी हुई है।
कोटद्वार डिपो के एआरएम टीकाराम आदित्य ने बताया कि सुबह चार बजे वाली बस को दिल्ली रवाना किया गया, जो दिल्ली पहुंच गई है। वह देर सांय तक वापस आ जायेगी। सुबह 5 बजे वाली बस दिल्ली के लिए रवाना गई, लेकिन इसी दौरान निगम के महाप्रबंधक की ओर से निर्देश दिये गये कि उत्तर प्रदेश की सीमा में उत्तराखण्ड परिवहन डिपो के वाहनों को कोरोना महामारी को देखते हुए प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिस कारण नजीबाबाद से बस को वापस बुला दिया गया। उन्होंने बताया कि शनिवार को त्रिपालीसैंण, बीरोंखाल, पौड़ी और धुमाकोट के लिए बस का संचालन किया गया। इन बसों में भी बहुत ही कम यात्रियों ने यात्रा की। वर्तमान में यात्रियों की संख्या बहुत ही कम हो गई है। एआरएम ने बताया कि यात्रियों की संख्या को देखते हुए देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश के लिए लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग से वाहन संचालन करने पर विचार किया जायेगा। साथ ही यात्री मिलने पर पहाड़ी मार्गों पर भी बसें संचालित की जायेगी।

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