जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : ग्रास्टनगंज क्षेत्र में खोह नदी के किनारे बाढ़ से बचाव के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार मंगलवार को तेज बारिश के दौरान नदी के उफान में ढह गई। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई यह दीवार करीब छह वर्ष में ही जवाब दे गई। दीवार के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुरक्षा दीवार पर लंबे समय से जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही थीं। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से समय रहते स्थिति का जायजा नहीं लिया गया। न ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई गई। मंगलवार को बारिश के बाद खोह नदी का जल स्तर बढ़ा और तेज बहाव ने कमजोर हो चुकी दीवार को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रास्टनगंज और आसपास के आबादी क्षेत्र को खोह नदी के कटाव से बचाने के उद्देश्य से तत्कालीन वन मंत्री एवं कोटद्वार के पूर्व विधायक डा. हरक सिंह रावत के कार्यकाल में इस सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया गया था। दीवार बनने के बाद क्षेत्रवासियों को नदी के कटाव और बाढ़ के खतरे से काफी राहत मिली थी। अब दीवार का बड़ा हिस्सा ढहने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि नदी में दोबारा तेज उफान आता है तो आबादी क्षेत्र में बाढ़ और भू-कटाव का खतरा बढ़ सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग से मौके का तत्काल निरीक्षण कराने, दीवार के निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। क्षेत्रवासियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब दीवार में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं तो समय रहते इसकी तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई। उनका कहना है कि सरकारी निर्माण की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत होती तो करोड़ों रुपये की लागत से बनी सुरक्षा व्यवस्था इतनी जल्दी ध्वस्त नहीं होती।