जयन्त प्रतिनिधि।
थलीसैंण : राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय थलीसैण, पौड़ी गढ़वाल में नव-प्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर नव-प्रवेशित छात्र-छात्राओं का भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. योगेंद्र चंद्र सिंह ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध विचार “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो जितना पिएगा वह उतना दहाड़ेगा” को उद्धृत करते हुए शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने अगस्त क्रांति/भारत छोड़ो आंदोलन का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षा हमें केवल व्यक्तिगत विकास ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज से जुड़ना भी सिखाती है।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से अतिथियों व प्राध्यापकों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस मौके पर डॉ. विकास प्रताप ने नए छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों, बहु-विषयक दृष्टिकोण और इसके महत्व से विस्तार से अवगत कराया। डॉ. सुधीर सिंह रावत ने एबीसी आईडी अपार आईडी तथा महाविद्यालय की परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा की। डॉ. रोशनी असवाल ने एक छोटी चिड़िया के अथक परिश्रम पर आधारित प्रेरक कहानी सुनाकर छात्रों को जीवन में कभी हार न मानने और निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। डॉ. बचन सिंह बिष्ट ने एनएसएस की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि यह संगठन युवाओं में समाज सेवा का भाव जगाकर समाज को जोड़ने का कार्य करता है। वहीं, डॉ. विक्रम रौतेला ने रोवर-रेंजर गतिविधियों के अनुशासन और साहसिक अभियानों के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विमल कुकरेती, डॉ. अतुल सिंह, चंदन सिंह जीना, डॉ. छाया सिंह, डॉ. जया कृष्ण, डॉ. हरिओम रावत, डॉ. प्रमिला, डॉ. गिरीश आर्य, डॉ. प्रदीप कुमार सहित नव-प्रवेशित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया।