जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पर्वतीय क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की आवश्यकता है। हिमालय को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के बजाय उनके विवेकपूर्ण उपयोग की नीति अपनानी होगी। यह बात बुधवार को नगर निगम प्रेक्षागृह में राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने कही।

‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड ग्रीन हिमालयन ग्रोथ’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह रावत, मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत मैती, राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी के प्राचार्य प्रो. हरीश चंद्र, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डीएस नेगी और प्रो. डीआर पुरोहित ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि राजकीय इंटर कॉलेज कण्वघाटी की छात्राओं ने वंदेमातरम गीत की प्रस्तुति दी। संगोष्ठी के संयोजक डा. दिवाकर बौध ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने लगातार नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार सामने आ रही आपदाओं से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में स्थानीय लोगों के रोजगार और व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ विनाश की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। सतत विकास को आधार बनाकर ढांचागत योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। मुख्य अतिथि विधायक दिलीप सिंह रावत ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब संसाधनों के दोहन के बजाय उनके समुचित उपयोग पर जोर देने की जरूरत है, जिससे प्रकृति के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ को रोका जा सके। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में विकास के लिए पारंपरिक ज्ञान और पौराणिक परंपराओं को भी साथ लेकर चलने पर जोर दिया। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए विकास की दिशा तय करनी होगी। कार्यक्रम में पूर्व शिक्षा निदेशक प्रदीप रावत, प्रो. प्रेम प्रकाश, प्रो. दीपक पांडे, प्रो. वीसी शाह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक मौजूद रहे।